झांसी। सरकारी अस्पतालों के साथ ही निजी अस्पतालों में डेंगू के मरीजों की भरमार है। डेंगू से ग्रसित होने वाले मरीजों की प्लेटलेट्स तेजी से कम हो रहीं हैं। जिसके चलते सरकारी अस्पतालों में प्लेटलेट्स की कमी हो गई है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में सिर्फ 15 यूनिट और मेडिकल कॉलेज के रक्तकोष में 59 यूनिट प्लेटलेट्स हैं। डॉक्टरों के मुताबिक इतनी प्लेटलेट्स से सिर्फ 40 मरीजों की जान बचाई जा सकती है। जिला अस्पताल में ओ और एबी पॉजिटिव प्लेटलेट्स शून्य हैं। वहीं मेडिकल कॉलेज में एबी, ए, ओ और बी निगेटिव प्लेटेलट्स ही नहीं हैं।
कोरोना संक्रमण के बाद अब डेंगू ने कोहराम मचा रखा है। मरीजों की संख्या में रोजाना इजाफा हो रहा है। मरीज में डेंगू की पुष्टि होते ही प्लेटलेट्स तेजी से कम हो रही हैं। स्वस्थ मरीज के खून में न्यूनतम डेढ़ लाख और अधिकतम चार लाख तक प्लेटलेट्स होती हैं।
मौजूदा समय में प्लेटलेेट्स की मांग इतनी बढ़ गई है कि जिला अस्पताल के साथ ही महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स का टोटा हो गया है। जो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के लिए चिंता का विषय है।
एक यूनिट से बढ़ते हैं पांच हजार प्लेटलेट्स
मरीज के खून में प्लेटलेट्स की कमी को दूर करने के लिए चिकित्सक द्वारा प्लेटलेट्स चढ़ाई जाती हैं। एक यूनिट ब्लड से मरीज के खून में पांच हजार प्लेटलेट्स की कमी को दूर किया जाता है।
पांच दिन में खराब हो जाता है
स्वस्थ मरीज से निकाले गए खून के प्लेटलेट्स को प्लेटलेट्स एजिटेटर मशीन में 22 डिग्री सेल्सियस तापमान में रखा जाता है। सिर्फ पांच दिन बाद ही प्लेटलेट्स खराब हो जाती हैं।
चालीस हजार से कम होने पर मरीज होता है गंभीर
चिकित्सकों के अनुसार डेंगू के मरीजों में तेजी से प्लेटलेट्स कम होती हैं। इलाज के दौरान प्लेटलेट्स को नियंत्रित किया जाता है। चालीस हजार से कम होने पर मरीज गंभीर स्थिति में आ जाता है।
अस्पताल के अलावा बाहरी लोग भी प्लेटलेट्स लेने के लिए आ रहे हैं। रोजाना 25 से 30 यूनिट प्लेटलेट्स की मांग है। मेडिकल कॉलेज में 59 यूनिट प्लेटलेट्स हैं। इनको बढ़ाने के इंतजाम किए जा रहे हैैं।
डॉ. एमएल आर्य, रक्तकोष प्रभारी, मेडिकल कॉलेज
एकाएक प्लेटलेट्स की मांग अधिक हो गई है। ब्लड बैंक में ओ और एबी पॉजिटिव प्लेटलेट्स खत्म हो चुकी हैं। महज 15 यूनिट प्लेटलेट्स बाकी हैं।
डॉ. एमएस राजपूत, ब्लड बैंक प्रभारी, जिला अस्पताल