झांसी। 22 लाख की आबादी पर झांसी में सिर्फ चार एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस हैं। कोरोना की पहली, दूसरी लहर में भी कई मरीजों की जान इस एंबुलेंस ने बचाई। वहीं, मेडिकल कॉलेज की पंजीकरण होने के बावजूद एक एंबुलेंस डेढ़ साल से एएलएस में तब्दील नहीं हो पाई है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि तीसरी लहर आई तो इन सीमित संसाधनों में फिर व्यवस्था बेपटरी न हो जाए।
एएलएस एंबुलेंस एक आईसीयू की तरह होती है। जिसमें गंभीर मरीजों के लिए हर सुविधा मौजूद होती है। यदि किसी गंभीर मरीज को रेफर किया जाता है, तो देश के किसी भी अस्पताल में सुरक्षित ले जाने का काम ये ही एंबुलेंस करती है। इसमें सभी जीवनरक्षक उपकरण होते हैं। आकस्मिक स्थिति के समय जरूरी दवाओं, वेंटिलेटर, डिफिब्रिलेटर सहित अन्य उपकरणों की भी सुविधा होती है। गोल्डन समय में सपोर्ट मिलने से बहुत से गंभीर रोगियों की जान बच जाती है। झांसी में ऐसी सिर्फ चार ही एंबुलेंस हैं। जबकि, झांसी से कई छोटे जनपदों में भी इतनी ही एंबुलेंस हैं। वहीं, 102 की 24 और 108 की 26 एंबुलेंस हैं। कोरोना की दूसरी लहर पीक पर पहुंची तो रोजाना 1200 से ज्यादा मरीज सामने आ रहे थे। कई मरीजों को दूसरे शहर ले जाना पड़ता था तो कई रोगी घंटों एंबुलेंस का इंतजार करते रहते थे। बावजूद, इसके एंबुलेंस की संख्या अब तक बढ़ी नहीं है। वहीं, मेडिकल कॉलेज में डेढ़ साल पहले एएलएस में पंजीकृत हो चुकी एंबुलेंस को अब तक एएलएस में तब्दील नहीं किया है। सामान्य एंबुलेंस की तरह इसमें सिर्फ स्ट्रेचर है।
कहां-कहां रहती एएलएस
- मेडिकल कॉलेज
- जिला अस्पताल
- सीएचसी गुरसराय
- सीएचसी बामौर
दावा-मानक के अनुसार पूरे हैं कर्मचारी
102, 108 एंबुलेंस के मंडलीय परियोजना प्रबंधक दिनेश सिंह के मुताबिक जिले में 250 एंबुलेंस ड्राइवर व ईएमटी हैं। 12-12 घंटे की इनकी ड्यूटी रहती है। ड्यूटी के दौरान हर एंबुलेंस में एक ड्राइवर, एक एएलटी रहता है। एक ड्राइवर रिजर्व में रहता है।
रिस्पांस समय में खरी उतरी एंबुलेंस
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने बताया कि शासन की तरफ से एंबुलेंस का रिस्पांस समय 15 मिनट है। यानी कि सूचना मिलने पर चालक को 15 मिनट में मरीज के पास तक पहुंचना होता है। पिछली जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में 108 एंबुलेंस का रिस्पांस समय 14.25 मिनट और 102 का 14 मिनट था।
एंबुलेंस का पंजीकरण एएलएस में होने की जानकारी अभी नहीं है। इस मामले को शुक्रवार को पता करूंगा। यदि पंजीकरण है तो तुरंत एएलएस में तब्दील करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।