झांसी। वन माफियाओं द्वारा पिछले दो दशक के भीतर वन कर्मियों पर तकरीबन सौ से अधिक हमले हो गए हैं लेकिन आधुनिक हथियारों का टोटा होने के कारण माफियाओं से मुठभेड़ होने वन कर्मी पीछे कदम खींचने को मजबूर हो जाते हैं। वर्तमान में एक रेंज में एक ही बंदूक से काम चलाया जा रहा है। विभाग द्वारा आधुनिक हथियारों के लिए कई बार मांग की गई है, लेकिन कोई भी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है।
झांसी, ललितपुर और जिला जालौन में 1,33,744 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में वन क्षेत्र फैला हुआ है। इन जंगलों में बेशकीमती पेड़ लगे हुए हैं। वनों की रक्षा के लिए झांसी में सात, ललितपुर में आठ व जालौन में आठ रेंज हैं। वनों की सुरक्षा के लिए इन रेंजों में एक रेंजर, एक वन दरोगा व एक वन रक्षक को तैनात किया गया है। प्रत्येक रेंज में सिर्फ 12 बोर या 315 बोर की महज एक ही बंदूक दी गई है।
वर्तमान में पुराने ढर्रे की राइफलों से ही वन की रक्षा की जा रही है। उधर, माफियों द्वारा बेशकीमती लकड़ी को काटा जाता है तो उनके पास आधुनिक हथियार होते हैं। ऐसे में वन कर्मियों को पीछे हटना पड़ता है। आधुनिक हथियारों के लिए कई बार मुख्यालय को लिख रूप से मांग की गई है, लेकिन अब तक कोई भी अहम कदम नहीं उठाया गया हालांकि दो दशक में भीतर वन कर्मियों द्वारा करीब तीन हजार से अधिक लोगों को पकड़कर कार्रवाई कई गई है।
वन कर्मियों को आधुनिक हथियार मुहैया करने के लिए कई बार मुख्यालय को पत्र लिख कर स्थिति से अवगत करा दिया गया है। वहीं बैठकों में भी आधुनिक हथियारों की मांग की गई है। जल्द ही आधुनिक हथियार मिलने की की उम्मीद है।
पीपी सिंह, मुख्य वन संरक्षक, बुंदेलखंड जोन