झांसी। शहर में अधिकांश नर्सिंग होम और अस्पताल बिना नक्शा पास कराए बने हैं। झांसी विकास प्राधिकरण की जांच में यह खुलासा हुआ है। इसे संज्ञान में लेते हुए प्राधिकरण ने मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि नर्सिंग होम और निजी अस्पतालों का स्वीकृत मानचित्र देखने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाए। ऐसे में नर्सिंग होम की मुश्किलें बढ़ना तय हैं।
शहर व आसपास के अधिकतर नर्सिंग होम व निजी अस्पताल मानक के अनुरूप नहीं हैं। अधिकांश नर्सिंग होम का नक्शा जेडीए से पास नहीं है। कई नर्सिंग होम मकान के नक्शों पर संचालित हो रहे है। इस कारण ऐसे नर्सिंग होम मरीजों के जीवन से खिलवाड़ करते हैं। अधिकांश नर्सिंग होम में पार्किंग नहीं है, आग बुझाने के लिए पानी का टैंक आदि पर्याप्त इंतजाम नहीं है। मानक के अनुरूप मरीजों को लिटाने की उचित व्यवस्था नहीं है। ऐसे में यदि कोई हादसा हो जाता है तो इससे मरीजों की जान का खतरा रहता है। पिछले दिनों नर्सिंग होम और अस्पतालों की जांच झांसी विकास प्राधिकरण द्वारा की गई।
जांच के दौरान अधिकतर अस्पतालों को आवासीय भू-उपयोग और इमारत मानक के अनुरूप नहीं पाया गया, जबकि शहर में सौ से अधिक नर्सिंग होम व निजी अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं। अधिकतर अस्पतालों व नर्सिंग होम को मानक ताक पर रखकर संचालित किया जा रहा है। इसकी शिकायत शासन स्तर पर की गई, लेकिन कोई कार्रवाई अमल में नही लाई गई है। पिछले दिनों जेडीए ने शहर व आसपास के नर्सिंग होम व निजी अस्पतालों की जांच की थी। इसमें से अधिकतर अस्पतालों में अग्निशमन की औपचारिकताएं अपूर्ण पाई गईं। इमारतों का निर्माण भू-उपयोग के विपरीत कराया गया है। अस्पतालों में पार्किंग नहीं मिली। इसे देखते हुए झांसी विकास प्राधिकरण ने मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और सीएमओ को पत्र लिखा है।
झांसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष सर्वेश कुमार दीक्षित ने बताया जांच के दौरान अधिकतर नर्सिंग होम व निजी अस्पताल मानक के विपरीत पाए गए हैं। उन्होंने पत्र में कहा है कि लाइसेंस नवीनीकरण के साथ ही नए लाइसेंस जारी करने से पहले जेडीए से स्वीकृत मानचित्र देखकर ही लाइसेंस जारी किए जाएं।