झांसी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन 500 बेड की बिल्डिंग में 100 बेड की इमरजेंसी और इतने ही बेड का ट्रामा सेंटर शुरू करने के दावे से पीछे हट गया है। अब कहा जा रहा है कि 15 जनवरी तक 30 बेड की इमरजेंसी व ट्रॉमा सेंटर शुरू होगा। शासन से बजट मिलने के बाद बेड की संख्या बढ़ाई जाएगी।
प्रो. शिव कुमार ने प्रधानाचार्य का पद संभालने के बाद 500 बेड की बिल्डिंग शुरू करने के दिशा-निर्देश दिए थे। उन्होंने निरीक्षण के बाद बिल्डिंग हैंडओवर लेकर 100 बेड की इमरजेंसी और 100 बेड का ट्रॉमा सेंटर शुरू करने के लिए कहा था। दावा किया था कि 31 दिसंबर तक बिल्डिंग हैंडओवर हो जाएगी और इमरजेंसी व ट्रॉमा सेंटर शुरू हो जाएगा। लेकिन कई खामियों की वजह से बुधवार तक बिल्डिंग हैंडओवर नहीं हो सकी। 100-100 बेड के ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी को लेकर मंथन हुआ तो स्पष्ट हुआ कि इतने बेड नहीं हैं। जब तक शासन को भेजे प्रस्ताव के अनुसार धनराशि अथवा उपकरण नहीं आते, तब तक इनको शुरू करना संभव नहीं है। अब कॉलेज प्रशासन ने यूटर्न लिया है। तय हुआ कि दो-तीन दिन में बिल्डिंग हैंडओवर होने के बाद 30 बेड की इमरजेंसी व ट्रॉमा सेंटर शुरू किया जाएगा।
सीएमएस डॉ. सचिन माहुर का कहना है कि फिलहाल 15 जनवरी तक 30 बेड की इमरजेंसी व ट्रॉमा सेंटर शुरू किया जाएगा। इसके बाद जैसे ही उपकरण आएंगे वैसे ही बेडों का विस्तार किया जाएगा।
बेडों के निर्धारण को लेकर पेंच
500 बेड के अस्पताल की बिल्डिंग में बेडों के निर्धारण का पेंच फंस गया है। कॉलेज प्रशासन बैठक दर बैठक कर रहा है मगर निष्कर्ष नहीं निकल रहा है। मेडिसिन विभाग, बाल रोग विभाग, स्त्री रोग विभाग, सर्जरी विभाग, ईएनटी, नेत्र रोग विभाग आदि अपने लिए बेडों का निर्धारण करने की मांग कर रहे हैं। कॉलेज प्रशासन अब मेडिसिन विभाग को बेड देना नहीं चाहता है। तर्क दिया जा रहा है कि वार्ड बिल्डिंग में ही 200 बेड देना संभव होगा। स्त्री रोग विभाग के लिए कहा जा रहा है कि स्मार्ट लेबर रूम के साथ वर्तमान वार्ड पर्याप्त है। सूत्रों का कहना है कि कॉलेज प्रशासन सर्जरी, आर्थो, नेत्र रोग व ईएनटी विभाग को 500 बेड अस्पताल की बिल्डिंग में बेड देने का मन बना चुका है। सीएमएस डाॅ. सचिन माहुर का कहना है कि बेडों के निर्धारण को लेकर जल्द सभी विभागाध्यक्षों के साथ बैठक होगी, तभी कोई फैसला होगा।