अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस की पात्रता का निर्धारण अब क्षेत्रीय निरीक्षक (टेस्टिंग) के हाथ में नहीं रहेगा। नई व्यवस्था के तहत अब सेंसर और कैमरे की निगरानी में परीक्षण होगा। इससे न सिर्फ परिणाम में सटीकता बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी। खास बात यह कि टेस्ट खत्म होने के एक मिनट बाद ही पंजीकृत फोन नं. पर पास या फेल का परिणाम मिल जाएगा। अगर पास हुए तो 15 दिन के अंदर ही लाइसेंस सीधे घर पहुंचेगा।
यह नई व्यवस्था अप्रैल से शुरू होने जा रही है। इसके लिए आईटीआई स्थित ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड टेस्टिंग इंस्टीट्यूट (डीटीटीआई) के ड्राइविंग व टेस्टिंग ट्रैक पर सेंसर और कैमरे लगाने का काम शुरू कर दिया गया है, जो मार्च के मध्य तक लग जाएंगे। 15 दिन ट्रायल के बाद आरटीओ के अधिकारी-कर्मचारी सेंसर व कैमरे लगे ट्रैक पर टेस्ट लेंगे।
ट्रैक पर लगे सेंसर और कैमरों को मुख्यालय से जोड़ा जाएगा। जैसे ही कोई व्यक्ति टेस्ट देने के लिए वाहन लेकर ट्रैक पर आएगा, वैसे ही सेंसर और कैमरे की निगरानी में टेस्ट शुरू हो जाएगा। इसमें पास न होने पर करीब तीन माह बाद फिर से टेस्ट देने के लिए आना होगा। बताते चलें कि लर्निंग लाइसेंस बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन होता है। पात्रता की जांच के बाद ऑनलाइन ही लर्निंग लाइसेंस जारी किया जाता है।
ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड टेस्टिंग इंस्टीट्यूट के ट्रैक पर सेंसर व कैमरे लगाए जा रहे हैं ताकि बिना आरोप-प्रत्यारोप के स्थायी लाइसेंस बन सकें। - एके त्रिवेदी, आरटीओ (प्रशासन)