झांसी। दीवाली पर घर की पुताई भी महंगी हो गई है। पेट्रोल, डीजल और केमिकल के दाम बढ़ने से डिस्टेंपर के दामों में 15 फीसद तक का इजाफा हुआ है। इसके अलावा प्राइमर और तारपीन के तेल के दामों में भी उछाल आया है। कोरोना के चलते लगे लॉकडाउन में व्यापार ठप रहने से टूटे व्यापारियों की त्योहार पर अच्छी बिक्री की उम्मीदें टूट गई हैं। त्योहार नजदीक आ रहा है, लेकिन दुकानों पर भीड़ नजर नहीं आ रही है।
नवरात्र से ही लोगों के घरों में साफ-सफाई और पुताई का काम शुरू हो जाता है। पेंट की दुकानों पर भीड़ लगने लगती है। लेकिन इस बार पेट्रोल, डीजल के दामों में लगी आग ने पेंट कारोबार को भी प्रभावित किया है। हालात यह हैं कि डिस्टेंपर के दामों में 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 15 किलो की डिस्टेंपर की बाल्टी के रेट में 750 रुपये तक का इजाफा हुआ है। इसके अलावा मेलामाइन, प्राइमर, तारपीन के तेल के रेट भी बढ़ गए हैं। कारोबारी भी बढ़ते दामों को लेकर परेशान हैं।
तरह-तरह के पेंट मौजूद
सभी ब्रांडेड दुकानों पर 45 रुपये किलो से लेकर 750 रुपये किलो की कीमत तक डिस्टेंपर उपलब्ध हैं। इसमें कंपनी के अच्छी क्वालिटी वाले डिस्टेंपर 80 से 100 रुपये प्रति किलो मिल रहे हैं। जबकि कंप्यूटर तकनीकी से बनने वाले इमलसन डिस्टेंपर प्रति किलो 150 रुपये से 750 रुपये तक की कीमत के मिल रहे हैं। इस बार 380 रुपये प्रति किलो का रंगोली इजी क्लीन डिस्टेंपर उपभोक्ता ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इस डिस्टेंपर की खासियत है कि दीवार पर लगने के बाद इसमें चमक आ जाती है। धुलाई कर सकते हैं। पर्यावरण को भी शुद्ध रखता है।
पेंटरों ने भी बढ़ाई दिहाड़ी
दीपावली के 21 दिन बाकी हैं और हर व्यक्ति इससे पहले घर की साफ- सफाई और पुताई का काम पूरा करने में लगा हुआ है। इससे बाजार में पुताई करने वाले मजदूर और पेंटरों का भी टोटा हो गया है। कोई भी एक दिन के काम के 600 रुपये से कम लेने को कोई तैयार नहीं है। उस पर भी पेंटरों की कई शर्तें भी रहती हैं।
पिछले तीन महीने से डिस्टेंपर के दामों में लगातार इजाफा हो रहा है। नवरात्र में भीड़ बढ़ जाती थी, जो इस बार दिखाई नहीं दे रही है।
सुनील पारेचा, कारोबारी झोकन बाग।
डिस्टेंपर पर जो दाम बढ़े हैं उनका असर इस बार त्योहार के कारोबार पर पड़ना तय है। स्टॉक तो बहुत है, लेकिन उतना बिकने की उम्मीद कम लग रही है।
मुकेश अग्रवाल, कारोबारी झोकन बाग।
कोरोना के चलते पिछले डेढ़ साल से कारोबार बेहद मंदा चल रहा है। दरें बढ़ने से भी दुकानदारी पर असर पड़ना तय है।
कुलदीप, कारोबारी आंतिया तालाब।
पिछले सालों की तुलना में इस बार पेंट्स और डिस्टेंपर खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या अभी बेहद कम बनी हुई हैं।
राजीव कुमार, कारोबारी गुंसाई पुरा मानिक चौक।
ये भी जानिए
- महानगर में छोटी-बड़ी 40 दुकानें हैं पेंट और डिस्टेंपर की।
- 10 कंपनियों के डिस्टेंपर बाजार में उपलब्ध हैं।
- पसंद का रंग तैयार करने के बाद उसका नंबर जरूर संभाल कर रखें।
- ब्रांडेड पेंट और डिस्टेंपर खरीदें तो बेहतर।