झांसी। इस बार सूटकेस के रंग बताएगा कि हज यात्री भारतीय हैं। हज कमेटी ने यह कदम इसलिए उठाया है कि अगर मक्का मदीना या फिर एयरपोर्ट पर हज यात्रियों का सामान इधर उधर हो जाता है तो सूटकेस के रंग के आधार पर आसानी से पहचान की जा सकेगी। हज कमेटी द्वारा सूटकेसों को हज पर जाने वालों के घर भेजने की व्यवस्था की है।
सऊदी अरब में हज यात्रा के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं। इस दौरान एयरपोर्ट पर हज यात्रियों का जमावड़ा रहता है। जिसके चलते हज यात्रियों का सामान अक्सर इधर-उधर हो जाता है। जिससे हज यात्रियों को परेशानियों से रूबरू होना पड़ता है। लेकिन इस बार भारतीय हज यात्रियों और उनके सामान की पहचान के लिए हज कमेटी ऑफ इंडिया द्वारा एक ही रंग और आकर के दो सूटकेस दिए जाएंगे। जिसमें वह अपना सामान रखकर यात्रा पार जा सकेंगे। एक रंग और आकार होने के कारण अरब देश के एयर पोर्ट और रुकने के स्थान पर सामान को आसानी से पहुंचाया जा सकेगा। वहीं सूटकेस का रंग एक जैसा होने के कारण भारतीय हज यात्रियों को भी दूर से ही पहचाना जा सकेगा।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अमित प्रताप सिंह ने बताया कि भारतीय हज यात्रियों और उनके सामान की पहचान के लिए हज कमेटी ऑफ इंडिया द्वारा एक ही रंग और आकार के दो सूटकेस दिए जाएंगे। इस व्यवस्था को पहली बार किया जा रहा है। यहां बता दें कि बुंदेलखंड से करीब 300 लोग हजयात्रा पर जा रहे हैं। सर्वाधिक संख्या बांदा और हमीरपुर के लोगों की है।
हज यात्रा पर जाने के लिए जिले भर से 130 लोगों ने आवेदन किया था। लेकिन 60 आवेदकों की आयु 65 वर्ष से अधिक होने के कारण उनके आवेदनों को निरस्त कर दिया गया है। इस बार जिले भर से महज 70 लोग ही हज यात्रा पर जाएंगे।
दो साल बाद मिला हज करने का मौका
कोरोना संक्रमण के कारण पिछले दो साल से हज यात्रा पर पाबंदी लगी हुई थी। संक्रमण का दायरा सिमटते ही सऊदी अरब सरकार ने सशर्त हज करने की अनुमति को प्रदान किया है। जिसके तहत भारतीय द्वारा हज यात्रा के लिए आवेदन किए हैं।