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झांसी में मच्छरों पर अब ग्यारह विभाग मिलकर करेंगे हमला

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झांसी। गर्मी शुरू होते ही बढ़ रही क्यूलैक्स मच्छरों को मारने के लिए संसाधनों की कमी से जूझ रहा मलेरिया विभाग अब अकेले नहीं लड़ेगा। अब जिले के 11 विभाग मिलकर मच्छरों को मारेंगे और इससे होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करेंगे। इसकी शुरूआत 2 अप्रैल से की जा रही है।
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जिला मलेरिया विभाग में वर्ष 1980 से कोई नई भर्ती नहीं हुई। मलेरिया रोधी कीटनाशक के छिड़काव के लिए विभाग के पास मात्र 14 लोगों का ही स्टाफ है। ऐसे ही तमाम कारणों के चलते इस बार मच्छर जनित बीमारियों के सीजन (जुलाई से नवंबर) से पहले अप्रैल में ही मच्छरों से निपटने के लिए अभियान शुरू किया जा रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी आरके गुप्ता ने बताया कि इस बार मच्छरों से निपटने के लिए जिले के 11 विभाग मिलकर काम करेंगे। संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत इस पर 30 अप्रैल तक काम होगा। इसके बाद आगे की रणनीति तैयार होगी। उन्होंने बताया कि शनिवार को जिला स्तर पर डीएम की बैठक भी बुलाई गई है।
ये हैं विभाग
1-चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग : संचारी रोगों और दिमागी बुखार से संबंधित केसों की रोकथाम और निगरानी।
2-नगर विकास विभाग : सफाई और मोहल्ला निगरानी समिति के माध्यम से जागरूकता।
3-पंचायतीराज/ग्राम्य विकास विभाग : ग्राम प्रधान अभियान के नोडल होंगे। घर से जल निकासी और जन-जागरण कराना।
4-पशुपालन विभाग : सूकर बाड़ों और पोल्ट्री स्थल पर सफाई, कीटनाशक छिड़काव एवं मच्छररोधी जाली ढकवाना।
5-बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग : आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर दिमागी बुखार व रोगों का आंकड़ा लेंगी।
6-शिक्षा विभाग : अभिभावकों व शिक्षकों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर रोगों से बचाव, रोकथाम और जागरूकता पर काम करेगा।
7-चिकित्सा एवं शिक्षा विभाग : रोगों की जांच और मरीजों की संख्या में वृद्धि होने पर जांच की व्यवस्था पर काम करना होगा।
8-दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग : दिव्यांग बच्चों के लिए आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराना।
9-कृषि एवं सिंचाई विभाग : जमे हुए पानी में मच्छरों के प्रजनन को रोकने और मच्छर रोधी पौधे लगवाना।
10-सूचना विभाग : विभागों से नियमित संपर्क एवं सूचनाएं भेजना।
11-उद्यान विभाग : सार्वजनिक उद्यानों एवं विद्यालयों में मच्छर रोधी पौधों का रोपण।
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पहले से ज्यादा ताकतवर हो रहे मच्छर
झांसी। मलेरिया विभाग की मानें तो मच्छर पहले से ज्यादा ताकतवर हो रहे हैं। उन पर कीटनाशक का असर भी कम ही देखने को मिल रहा है। आए दिन लोग विभाग में बताते हैं कि मच्छरों पर क्वाइल आदि का असर नहीं हो रहा है। इससे बचने के लिए लोगों को क्वाइल की बजाय मच्छरदानी लगाकर सोने की सलाह दी जा रही है।
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11 साल से परिसर में खड़े कंडम महामाया वाहनों और गंदगी से विभाग हो रहा बीमार
झांसी। मलेरिया विभाग के परिसर में वर्ष 2012 से खड़े कंडम महामाया सचल दल योजना के पांच-छह वाहनों और परिसर में फैली गंदगी से विभाग खुद ही बीमार हो रहा है। ये वाहन यहां पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के शासन से खड़े हैं। वाहनों में जंग लगने के साथ-साथ गंदगी, घास और सीलन है। बारिश में मच्छर भी पनपते हैं। वहीं, कोरोना की तेजी के समय विभाग में जो जांच कैंप लगा था उसके खाली बॉक्स भी परिसर में पड़े-पड़े सड़ रहे हैं।
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