झांसी। कॉपियों में हैश टैग चिह्न बनाकर नंबर बढ़ाने के खेल का पर्दाफाश होने के बाद बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने आयुर्वेदिक कॉलेजों के नौ शिक्षकों को तीन साल के लिए डिबार कर दिया गया है। अब ये शिक्षक परीक्षा संबंधी कोई भी काम नहीं कर पाएंगे। यहां बता दें कि नंबर बढ़ाने के इस पूरे नेटवर्क का खुलासा अमर उजाला ने किया था। जिस पर अब बड़ी कार्रवाई की गई है।
सत्र 2020-21 की बीएएमएस छात्रों की परीक्षा के दौरान कई विद्यार्थियों की कॉपियों में विशेष चिह्न बने मिले। इस मामले में आरोपी पाए गए छात्र-छात्राओं का रिजल्ट निरस्त किया जा चुका है। इसके अलावा शिक्षकों की संलिप्तता पर समिति जांच कर रही थी। समिति ने कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन करने के बाद अपनी रिपोर्ट बीयू अधिकारियों को सौंपी। ये मामला परीक्षा समिति में ले जाया गया। पत चला कि छात्र-छात्राओं की कॉपियों में दोगुने तक का अंतर मिला है। इस पर राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज झांसी के सात और बांदा कॉलेज के दो शिक्षकों की मूल्यांकन में शिथिलता उजागर हो गई। परीक्षा नियंत्रक राजबहादुर ने बताया कि समिति ने सभी नौ शिक्षकों को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से जुड़े परीक्षा, गोपनीय समेत सभी कार्यों से तीन साल के लिए डिबार कर दिया है।
ये था मामला
बीयू से संबद्ध आयुर्वेदिक कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को कॉपियों में विशेष चिह्न बनाकर नंबर बढ़ाने के खेल का खुलासा अमर उजाला ने किया था। लगातार खबरों का प्रकाशन होने के बाद तत्कालीन कुलपति प्रो. जेवी वैशम्पायन ने जांच समिति गठित कर दी थी। समिति ने 3000 कॉपियों की पड़ताल की गई तो पता चला कि 653 कॉपियों में हैश टैग समेत विशेष चिह्न बनाए गए हैं। ये कॉपियां 180 छात्र-छात्राओं द्वारा लिखी गई। बुंदेलखंड के तीन आयुर्वेदिक कॉलेज के विद्यार्थियों की कॉपियों में चिह्न मिलने के बाद यूएफएम समिति को कार्रवाई के लिए उत्तर पुस्तिकाएं भेज दी गईं। समिति की सिफारिश के बाद मामले को परीक्षा समिति में ले जाया गया। वहां निर्णय होने पर बीयू ने लगभग डेढ़ सौ से अधिक विद्यार्थियों का रिजल्ट निरस्त कर दिया है।
ड्यूटी करने वाले शिक्षकों के खाते में जाएगा पारिश्रमिक
परीक्षा केंद्रों पर ड्यूटी करने वाले शिक्षकों को अब सीधे खाते में पारिश्रमिक भेजा जाएगा। राजभवन के निर्देश पर बीयू ने ये फैसला लिया है। दरअसल, अब तक केंद्र बने कॉलेज के अफसरों को एकमुश्त पैसा दे दिया जाता था। कई शिक्षक कॉलेज प्रशासन पर पारिश्रमिक नहीं देने का आरोप लगाते थे। मगर अब ये व्यवस्था पारदर्शी कर दी गई है।