झांसी। जिला अस्पताल में ऑटो एनालाइजर मशीन की दरकार है। ये मशीन बार-बार खराब हो जाती है। चूंकि, इस मशीन से लगभग 40 फीसदी मरीजों की जांचें होती हैं, इसलिए सबसे अधिक उपयोग भी होता है। नई मशीन के संबंध में शासन को प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है।
जिला अस्पताल में लगभग छह साल पहले ऑटो एनालाइजर मशीन आई थी। इस मशीन से लिवर फंक्शन टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, लिविड प्रोफाइल, शुगर, सीआरपी, आरए-फैक्टर समेत कई जांचें होती हैं। अस्पताल के स्टाफ ने बताया कि ओपीडी में दिखाने वाले लगभग 40 फीसदी मरीजों को डॉक्टर इनमें से कोई न कोई जांच जरूर लिखते हैं। ऐसे में ऑटो एनालाइजर मशीन पर काफी लोड रहता है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सीआरपी व अन्य जांचों के लिए भी यह मशीन खूब काम आई। मगर अब ये जवाब देने लगी है। ये मशीन अक्सर खराब हो जाती है। इसे सही कराने में एक सप्ताह से लेकर 10 दिनों तक का समय लग जाता है। ऐसे में मरीजों को काफी दिक्कत होती है। पैथोलॉजी लैब में तुरंत ही एक और मशीन की जरूरत है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है।
अभी मशीन ठीक है और इससे मरीजों की जांच भी हो रही है। यदि खराब होती है तो टेक्नीशियन को बुलाकर ठीक करा दिया जाता है। नई मशीन के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है। जल्द ही मिलने की उम्मीद है। - डॉ. अतुल गुप्ता, सीएमएस।