झांसी। माता जगदंबा की भक्ति का पर्व शारदीय नवरात्र सात अक्तूबर से प्रारंभ हो रहे हैं। इस बार माता रानी का दरबार आठ दिन सजेगा। खास बात यह है कि शक्तिस्वरूपा मां जगदंबा इस बार डोली पर विराजमान होकर आएंगी। मां का डोली पर आना श्रद्धालुओं के घर-परिवार में खुशहाली और समृद्धि लाएगा।
सनातन धर्म में शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व है। नवरात्र पर श्रद्धालु व्रत रखते हैं और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। सभी देवी मंदिरों में माता रानी के अनुपम दर्शन होंगे। जगह-जगह पंडाल सजा कर माता की दिव्य मूर्तियों को विधि विधान से विराजमान किया जाता है। आठ दिनों तक मां का दरबार सजा रहेगा।
शारदीय नवरात्र 7 अक्तूबर से प्रारंभ होंगे, 15 अक्तूबर को दशहरा मनेगा। शारदीय नवरात्र को लेकर महानगर के पंचकुइयां मंदिर, कैमासन मंदिर, महाकाली मंदिर, महालक्ष्मी मंदिर और लहर की माता मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में तैयारियां तेज हो गई हैं। महंत विष्णु दत्त के अनुसार नवरात्र बृहस्पतिवार से प्रारंभ हैं। ऐसेे में मां डोली पर विराजमान होकर आएंगी। इस साल शारदीय नवरात्र आठ दिन की होगी। पंचमी और षष्ठी की तिथि एक साथ मनेगी। नवरात्र के पहले दिन चर योग और चित्रा नक्षत्र रहेगा। पंडित रजनी दीक्षित बताती हैं कि माता का डोली पर आना परिवार में शुभ समृद्धि माना जाता है।
घट स्थापना सात अक्तूबर को सुबह 6 बजकर 17 मिनट से 7 बजकर सात मिनट तक शुभकारी रहेगी। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी।
कन्या पूजन : नवरात्र में कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। घरों में कन्या पूजन कर भक्त मां का भोग प्रसाद बनाते हैं और छोटी-छोटी कन्याओं प्रसाद खिलाते हैं। कन्याओं के माथे पर तिलक लगाक र उनके चरण पखारे जाते हैं। ऐसा करने से मां प्रसन्न होकर परिवार को आशीष देती हैं। कन्या पूजन में एक से 8-9 वर्ष तक की कन्याओं का पूजन अधिक शुभ माना गया है। कन्याओं को मां का स्वरूप माना जाता है। कई भक्त चुनरी भी अर्पण करते हैं।