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एमएसपी से अधिक खुले बाजार में मूंगफली की कीमत

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झांसी। मूंगफली की खुले बाजार में कीमत उसके लिए तयशुदा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक हो गई। इसके चलते आज भोजला मंडी स्थित सरकारी क्रय केंद्र सूने पड़ गए। उम्मीद जताई जा रही कि अब अवाक कम एवं मांग बढ़ने से इनकी कीमतों में इजाफा ही होगा।
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केंद्र सरकार ने मूंगफली का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5275 रुपये प्रति क्विंटल तय कर दिया लेकिन, सरकारी क्रय केंद्र काफी विलंब से दिसंबर में खोले गए। पीसीयू के चार एवं पीसीएफ के दो केंद्र खुले लेकिन, किसानों को अधिक फायदा नहीं मिला। अक्तूबर माह में फसल आने के बाद मंडी में 3200-3500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बटाली एवं देशी मूंगफली बिक गई। कारोबारियों ने फायदा उठाकर किसानों से खरीद करके गोदाम में मूंगफली भर ली। दिसंबर महीने में बहुत कम किसानों के पास ही मूंगफली बची हुई थी।
रोजाना करीब दो क्विंटल मूंगफली ही किसान सरकारी केंद्रों तक ला रहे थे। अब जनवरी की शुरूआत में मूंगफली कम होने लगी। अवाक कम एवं मांग बढ़ने से मूंगफली के दाम खुले बाजार में यकायक चढ़ना शुरू हो गए। भोजला मंडी में बटाली मूंगफली का दाम बढ़कर करीब 5200-5300 रुपये जबकि देशी मूंगफली का दाम 6000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। ऐसे में सरकारी क्रय केंद्र बंद होने से पहले ही सूने पड़ गए। शुक्रवार को पीसीयू के क्रय केंद्र में कोई खरीद नहीं हो सकी।
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पहले ही बंद हो चुका पीसीयू का एक केंद्र
भोजला मंडी में पीसीयू ने दो खरीद केंद्र खोले थे। यह केंद्र जनवरी तक चलने थे लेकिन, एक खरीद केंद्र ने जनवरी की शुरूआत में ही अपने कांटे बंद कर दिए। इसी केंद्र में घटतौली करने के आरोप में जमकर हंगामा हुआ था। गरौठा विधायक जवाहर लाल राजपूत एवं विधायक राजीव सिंह पारीछा ने भी यहां पहुंचकर गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। पिछले दिनों नोडल अधिकारी के पहुंचने पर भी यह खरीद केंद्र बंद पाया गया। मंडी में मौजूद किसानों का कहना था कि यहां जनवरी से ही खरीद बंद कर दी गई।
गुणवत्ता न मिलने पर नैफेड ने लौटाई 1000 बोरी मूंगफली
खरीदी गई मूंगफली में गुणवत्ता न मिलने से नैफेड ने 1000 से अधिक बोरियां वापस लौटा दीं। नैफेड के मुताबिक मानक में 55-60 फीसदी दाना समेत मिट्टी, लकड़ी एवं कंकड़ की मात्रा दो फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए लेकिन, पड़ताल के दौरान दाने का प्रतिशत कम पाया गया। इस नाते इनको वापस कर दिया गया। इनके वापस लौटने पर अब केंद्र संचालक दो राहे में फंस गए क्यूंकि अधिकांश मूंगफली किसानों को पैसा दिया जा चुका। अब यह रिजेक्ट मूंगफली केंद्र संचालक के मत्थे आ गई।
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