फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बांदा जाने वाले मुसाफिरों के लिए सौगात बनी मेमू

विज्ञापन
रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर खड़ी मेमू ट्रेन में सफर करते यत्री। अमर उजाला
विज्ञापन
झांसी। झांसी से बांदा और मानिकपुर की तरफ छोटे स्टेशनों के लिए सफर करने वाले यात्रियों के लिए मेमू ट्रेन सौगात बन गई है। इस रूट पर एक्सप्रेस ट्रेनों की संख्या बेहद कम है, ऐसे में अनारक्षित मेमू गाड़ी की सुविधा मिलने से यात्री इसका पूरा लाभ उठा रहे हैं। उक्त रूट पर प्रतिदिन पांच हजार से अधिक यात्री सफर कर रहे हैं।
विज्ञापन

रेल मंडल में 30 सितंबर से अप और डाउन की पांच जोड़ी मेमू ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया था। इन ट्रेनों के चलने से छोटे स्टेशनों के यात्रियों के लिए सफर करना बेहद सुविधाजनक हो गया है। इनमें झांसी से बांदा के लिए दोपहर 12.25 बजे, झांसी से मानिकपुर के लिए शाम 5.25 बजे, झांसी से ललितपुर के लिए सुबह 6.10 बजे, झांसी से कानपुर के लिए सुबह 8.50 बजे और ललितपुर से बीना के लिए सुबह 10.25 बजे मेमू चलती है। इन दिनों झांसी- बांदा- मानिकपुर ट्रैक पर दौड़ रही मेमू में सबसे अधिक यात्री सफर कर रहे हैं। इनमें ओरछा, बरुआसागर, निवाड़ी, मगरपुर, टेहरका, रानीपुर रोड, मऊरानीपुर, रोरा, हरपालपुर, घुटई, बेलाताल, कुलपहाड़, चरखारी रोड, महोबा, बरीपुरा, कबरई, मटौंध, खैरार, बांदा, डिगवई, खुरंड, अतर्रा, बदौसा, भरतकूप, शिवरामपुर, चित्रकूट धामकर्वी, खोह, बहिलपुरवा, ओहन व मानिकपुर स्टेशन शामिल हैं। हालांकि, अभी यात्रियों से किराया जरूर पैसेंजर की जगह एक्सप्रेस ट्रेन के जनरल कोच के बराबर यात्रियों से लिया जा रहा है।
मेमू की कई सुविधाएं थकान करती हैं कम
मेमू ट्रेन की कई सुविधाएं सफर की थकान को कम करती हैं। मेमू ट्रेन के दरवाजे बड़े होते हैं, जिससे यात्रियों को चढ़ने तथा उतरने में आसानी होती है। यात्रियों के लिए सीट के अलावा कोच में खड़े रहने के लिए हैंडल की सुविधा है। मेमू कोच में लाइटिंग तथा पंखों की संख्या अधिक होती है। कोच में बायो टॉयलेट की सुविधा है। ट्रेन के कोच अंदर से एक दूसरे से कनेक्ट होते है, जिससे यात्री एक कोच से दूसरे कोच में आसानी से आ-जा सकते हैं। प्रत्येक कोच में 108 यात्रियों के बैठने तथा 216 यात्रियों के खड़े रहने की सुविधा है। इनमें फूट स्टेप्स होते हैं, जिससे लो लेवल प्लेटफार्म को ऊंचा करने की जरूरत नहीं होती है। स्टेशन से चलते ही ट्रेन गति पकड़ लेती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें