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मेमू और पैसेंजर ट्रेनों में नहीं रही पैर रखने की जगह, दरवाजे पर खड़े होकर किया सफर

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झांसी। छोटी दिवाली पर मेमू और पैसेंजर ट्रेनों में मुसाफिरों ने मंडल के छोटे स्टेशनों के लिए सबसे ज्यादा सफर किया। भीड़ के कारण कोचों में पैर रखने की जगह नहीं रही। यात्री दरवाजे पर खड़े रहे। बुधवार को काउंटरों से 15 हजार से अधिक जनरल टिकट बिके।
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बुंदेलखंड के महोबा, बांदा, मऊरानीपुर, कुलपहाड़, हरपालपुर, उरई समेत कई क्षेत्रों के तमाम लोग परिवार के साथ रहकर झांसी में काम करते हैं। बुधवार को अधिकांश ऐसे परिवारों ने घर वापसी की। इस कारण मेमू व पैसेंजर ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं रही। ऐसे में कई यात्रियों को दरवाजे पर लटककर सफर पूरा करना पड़ा। इस दौरान कोचों में यात्रियों के झगड़ने और धक्कामुक्की की कई घटनाएं हुईं। स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ के बीच व्यवस्था बनाने में कई बार सुरक्षा कर्मियों को कमान संभालनी पड़ी।
इसी तरह कानपुर, लखनऊ होकर गोरखपुर व बिहार की तरफ जाने वाली ट्रेनों की भी स्थिति खराब रही। इस रूट पर जाने वाली झांसी-लखनऊ इंटरसिटी, कुशीनगर एक्सप्रेस, साबरमती एक्सप्रेस, उद्योग नगरी एक्सप्रेस, पुष्पक एक्सप्रेस, लोकमान्य तिलक गोरखपुर एक्सप्रेस और ग्वालियर-बरौनी मेल के हालात सबसे अधिक खराब थे। प्रयागराज की तरफ जाने वाली गाड़ी संख्या महाकौशल एक्सप्रेस, बुंदेलखंड एक्सप्रेस में भी यात्रियों को मुश्किल भरी यात्रा करनी पड़ी। खासकर जिन यात्रियों के पास कंफर्म आरक्षण नहीं था और जो परिवार के साथ थे, उनको परेशानियों से अधिक दो-चार होना पड़ा। उधर, बस स्टैंड पर भी रेलवे स्टेशन जैसा नजारा रहा। अधिकांश बसें यात्रियों से ठसाठस भर के चलीं।
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