झांसी। बुंदेलखंड के औद्योगिक पिछड़ेपन को दूर करने के बड़े-बड़े दावे और वादों के बीच पिछले 10 साल के दरम्यान बिजौली औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित 180 इकाइयां बंद हो चुकी हैं, जिससे सीधे तौर पर साढ़े चार हजार लोगों को अपने काम से हाथ धोना पड़ा है। उत्पादों को बाजार न मिलने और सरकार की ओर से अन्य कोई विशेष रियायतें न मिलने की वजह से उद्यमियों ने अपने कल-कारखानों पर ताले लटका दिए हैं। खासतौर पर बीएचईएल की अनदेखी इन छोटे उद्यमों पर भारी पड़ी है।
ललितपुर रोड पर बिजौली में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना 1980 के दशक में हुई थी। इसके बाद बिजौली ग्रोथ सेंटर स्थापित किया गया था। बुंदेलखंड के औद्योगिक विकास की दृष्टि से ये बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे थे। सरकार की ओर से यहां उद्यम स्थापित करने वाले उद्यमियों को विशेष रियायतें दीं गईं थीं। उनके बिजली बिलों से लेकर करों तक में विशेष छूट का प्रावधान किया गया था। इसी का नतीजा रहा कि यहां एक के बाद एक इकाइयां लगती चलीं गईं। यहां 329 उद्यम स्थापित हो गए थे और ये इलाका रोजगार का बड़ा केंद्र बन गया था। इसमें बड़ी भूमिका बीएचईएल की भी थी। यहां कई इकाइयां बीएचईएल के भरोसे चल रहीं थीं। छोेटे कलपुर्जे बनाकर वे बीएचईएल को आपूर्ति करती थीं। लेकिन, सरकार की ओर से मिलने वाली रियायतों के खत्म होने के बाद वक्त ने करवट बदली। यहां बीएचईएल की ओर से भी स्थानीय इकाइयों ऑर्डर देने में कंजूसी की जाने लगी। एक-एक कर उद्योग दम तोड़ने लगे। पिछले 10 साल के दरम्यान यहां संचालित 329 में से 180 इकाइयों के दरवाजे बंद हो चुके हैं, जिससे सीधे तौर पर साढ़े चार हजार लोगों के हाथ से काम छिना।
अब पसरा रहता है सन्नाटा
झांसी। एक समय में बिजौली औद्योगिक क्षेत्र में चौबीसों घंटे रौनक बनी रहती थी। दूर से ही कारखानों में चलने वाली मशीनों की आवाज सुनाई देने लगती थीं। मजदूरों की आवाजाही लगी रहती थी। इलाके में जगह-जगह जलपान की दुकानें थीं, जिन पर सुबह से लेकर देर शाम तक लोगों का जमघट लगा रहता था। लेकिन, अब औद्योगिक क्षेत्र सन्नाटे के आगोश में समाए नजर आते हैं। पहले जैसी हलचल अब यहां नहीं रही है।
बीएचईएल ने छह इकाइयों की आपूर्ति रोकी
झांसी। बीएचईएल ने हाल ही में बिजौली में स्थित छह इकाइयों की आपूर्ति पर रोक लगा दी है। उद्यमियों की ओर से आरोप लगाया गया कि बाहरी कंपनियों को लाभ देने के लिए स्थानीय इकाइयों को नजरअंदाज किया जा रहा है। इस पर प्रशासन की ओर से जांच शुरू कर दी गई है। जांच में आपूर्ति रोके जाने के सही कारण तलाश किए जा रहे हैं।
बीएचईएल में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसके अलावा समयबद्धता भी जरूरी होती है। कंपनी इससे किसी तरह का समझौता नहीं करती। इन्हीं कमियों की वजह से कुछ उद्यमों की आपूर्ति पर रोक लगाई गई है।
- डा. संतोष मिश्रा, उप प्रबंधक - बीएचईएल
उद्यमियों को बेहतर माहौल मिले इसकी पूरी कोशिश की जा रही है। सरकार की ओर से भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। बदलाव भी नजर आने लगा है। आने वाले दिनों में झांसी में कई बड़े उद्योग स्थापित होंगे।
- मनीष चौधरी, उपायुक्त उद्योग
क्षेत्र में माइक्रो और स्मॉल इंडस्ट्री का बुरा हाल है। औद्योगिक विकास के लिए सरकार की ओर से योजनाएं तो तमाम बनाई गईं हैं, लेकिन धरातल पर उनका क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। इससे औद्योगिक विकास अवरुद्ध बना हुआ है। इसके अलावा लोगों में उद्यमिता का भी अभाव है।
- धीरज खुल्लर, जनरल सेक्रेट्री - बुंदेलखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
बिजौली औद्योगिक क्षेत्र को सबसे बड़ा झटका बीएचईएल ने दिया है। यहां ज्यादातर इकाइयां बीएचईएल पर आधारित थीं। लेकिन, भेल स्थानीय इकाइयों की जगह बाहरी कंपनियों से माल ले रहा है। इससे क्षेत्र के उद्योगों की कमर टूट गई है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।
- राजेश शर्मा, अध्यक्ष - चैंबर ऑफ स्मॉल एंड माइक्रो इंडस्ट्री