होंठ और तालू कटे 15 बच्चों की होगी सर्जरी
झांसी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत मंगलवार को जिला अस्पताल में शिविर लगाकर होंठ और तालू कटे बच्चों का परीक्षण किया गया। परीक्षण के लिए 17 बच्चे आए, जिसमें 15 को सर्जरी के लिए रेफर किया गया।
कानपुर की स्माइल ट्रेन संस्था ने जिला अस्पताल में कैंप लगाकर कटे होंठ व कटे तालू वाले बच्चों का परीक्षण किया। जिन 15 बच्चों को रेफर किया गया, उनमें एक बच्चे के होठों में सूजन थी। वहीं, दूसरा बच्चा सिर्फ 15 दिन का था, उसको 3 माह बाद सर्जरी के लिए रेफर किया जाएगा। आरबीएसके के डीईआईसी मैनेजर डॉ. रामबाबू ने बताया कि कटे होंठ एक जन्मजात विकृति है। यह गर्भावस्था के शुरूआती तीन महीनों में होता है। गर्भ में पहले होंठ बनते हैं, फिर तालू और मुंह में इसी दौरान टिश्यू और सेल सही से नहीं बन पाने पर कटे होंठ या तालू की स्थिति पैदा होती है। कटे होठों का मुख्य कारण अनुवांशिक भी होता है। वर्ष 2013 से अब तक ऐसे लगभग 80 बच्चों की सर्जरी हो चुकी है। सर्जरी में लगभग 30 से 40 हजार रुपये का खर्च आता है। आरबीएसके के तहत नि:शुल्क ऑपरेशन होता है।