झांसी। रेलवे टिकट चेकिंग कर्मचारियों के लिए बने रेस्ट हाउसों में अब चालक, गार्ड विश्रामालयों की तरह सुविधाएं मुहैया कराईं जाएंगी। इसमें रेस्ट हाउस के कमरों को वातानुकूलित समेत अन्य बदलाव कार्य होंगे। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में गाइड लाइन जारी कर दी है।
रेलवे में ट्रेन संचालन में अहम भूमिका निभाने वाले चालक व गार्डों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है। उनके विश्रामालय हमेशा चकाचक रहते हैं। वातानुकूलित कमरे, साफ सुधरे शौचालय, अच्छे पलंग, मच्छरदानी, गद्दा, तकिया, चादर, किचिन समेत अन्य बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराईं जातीं हैं ताकि उनको ट्रेन संचालन में कोई थकावट महसूस न हो। मगर टिकट चेकिंग कर्मचारियों के रेस्ट हाउसों का हाल ऐसा नहीं है। जैसे झांसी का चेकिंग स्टाफ निजामुद्दीन, नई दिल्ली, इटारसी, बांदा, कानपुर, लखनऊ ट्रेन ड्यूटी पर जाता है। इसी तरह आगरा, भोपाल, बांदा व अन्य जगहों का स्टाफ झांसी आता है। इन कर्मचारियों के विश्राम के लिए उक्त सभी जगह रेस्ट हाउस बने हैं लेकिन यहां सुविधाएं बेहतर नहीं है।
हर जगह कर्मचारी खटमल और मच्छरों से परेशान रहते हैं। शौचालयों की हालत खराब है। ज्यादातर रेस्ट हाउसों में किचन नहीं है। कर्मचारियों को स्टेशन के बाहर खाना पड़ता है। रेलवे संगठन लगातार चेकिंग कर्मचारियों की इस समस्या को उठाते आ रहे हैं। रेलवे बोर्ड ने अब गार्ड ड्राइवर विश्रामालयों की तरह चेकिंग कर्मियों के रेस्ट हाउस भी सुविधाएं उपलब्ध कराने की गाइड लाइन जारी की है। इस संबंध में पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने चेकिंग कर्मचारियों के रेस्ट हाउस बेहतर बनाने के लिए बोर्ड ने गाइड लाइन जारी की है। जल्द ही इस पर क्रियान्वयन शुरू हो जाएगा।
झांसी स्टेशन के रेस्ट हाउस का हाल बुरा
झांसी रेलवे स्टेशन पर पार्सल कार्यालय के निकट टिकट चेकिंग कर्मचारियों के लिए रेस्ट हाउस बना है। इस रेस्ट हाउस में छह कक्ष बने हैं। प्रत्येक कक्ष में आठ से दस पलंग बिछे हैं। इन कक्षों में न तो बेहतर गद्दे, चादर, तकिया उपलब्ध हैं और न ही मच्छरों से बचाव के साधन। शौचालय में हर तरफ छत से पानी टपकता रहता है। इस रेस्ट हाउस में पठानकोट कोट एक्सप्रेस, साबरमती एक्सप्रेस, पंजाब मेेज, मंगला एक्सप्रेस, गोवा एक्सप्रेस व अन्य ट्रेनों का स्टाफ आकर ठहराता है।