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किसान देशभर में बेच सकते अपनी उपज

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किसान देशभर में बेच सकते अपनी उपज
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- ई-नाम की सुविधा का लाभ लेकर पा सकते अच्छे दाम
- जागरूकता के अभाव में नहीं है योजना की जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) की ज्यादा जानकारी न होने की वजह से किसान इसका फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। ई-नाम के तहत किसान अपनी उपज को देश की किसी भी मंडी में बेच सकते हैं। इसके लिए किसानों को उपज का बेहतर मूल्य भी मिलता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2016 में इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) का पायलट परियोजना के तौर पर शुभारंभ किया था। यह सरकार के 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लक्ष्य का ही हिस्सा है। ये एक राष्ट्रव्यापी इलेक्ट्रॉनिक व्यापार मंच है, जो देश की सभी कृषि उपज मंडियों को आपस में जोड़ता है। इससे किसानों को देशभर की कृषि मंडियों में कृषि जिंसों का भाव पता चलता है। इसका मकसद किसानों की बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने में मदद करना है। देशभर की कई मंडियों में ई-नाम से व्यापार करने की सुविधा है। सरकार की योजना ये लगातार मंडियों को जोड़ रही है। अलग-अलग राज्यों की कृषि उपज मंडियों के बीच ई-नाम मंच से कृषि उत्पादों के व्यापार को अब धीरे-धीरे गति मिल रही है। एक राज्य की मंडी की उपज दूसरे राज्य में बेची जा रही है।
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गौरतलब है कि पहले कृषि उपज मंडी समितियों के भीतर या एक ही राज्य की दो मंडियों में कारोबार होता था। अब अलग-अलग राज्यों के बीच ई-नाम से व्यापार किया जा रहा है। उत्तराखंड के हल्द्वानी का एक किसान अपने टमाटर बरेली की मंडी के एक व्यापारी को बेच रहा है। वहीं, मुरादाबाद मंडी का किसान उत्तराखंड की रुद्रपुर मंडी के व्यापारी के साथ सौदा कर रहा है। ऐसे अनेकों उदाहरण सामने हैं।
भोजला मंडी में बन रहा कार्यालय
भोजला मंडी में ई-नाम का नया कार्यालय बन रहा है। यहां पर किसानों की उपज की जांच के लिए लैब भी स्थापित होगी। देश भर की प्रमुख मंडियों में संचालित हो रही इस व्यवस्था के अंतर्गत किसानों की आवक को जांच कर उसका लॉट नंबर जारी किया जाता है। यह लॉट नंबर मंडी में लगी डिजिटल स्क्रीन पर डिस्प्ले किया जाता है। इससे मंडी में मौजूद व्यापारी और खरीदार किसानों का माल खरीदते हैं। किसानों की आवक का मूल्य उसके ए, बी, सी ग्रेडिंग के आधार पर तय होता है। जितना अच्छा ग्रेड होगा, उतना अच्छा मूल्य मिलेगा।
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वर्जन..
राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) किसानों की उपज को बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने का अच्छा मंच है। किसानों को इसका अधिक से अधिक लाभ लेना चाहिए। लैब में जांच के बाद उपज की ग्रेडिंग की जाती है। जितनी अच्छी ग्रेडिंग होगी, उतना अच्छा मूल्य मिलेगा। - सीपी तिवारी, उप निदेशक, मंडी।
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