झांसी। सूखे की पहचान बन चुके बुंदेलखंड में काफी कुछ बदल चुका है। हर बार सूखे की मार झेलने वाले किसानों की मेहनत ने झांसी की बंजर जमीनों में फसल उगाई है। हाल ही में रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विवि की ओर से किए गए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि किसानों ने तकनीक के साथ कदमताल करते हुए बीते 20 साल में झांसी की सवा लाख हेक्टेयर जमीन को उपजाऊ बना दिया। जिन जमीनों पर कभी सूखे की मार पड़ती थी, वे अन्न उगा रही हैं। इसके साथ ही करीब ढाई हजार हेक्टेयर में फैले जंगल अब पानी का बड़ा स्रोत बन चुके हैं।
बुंदेलखंड को हमेशा से सूखे के लिए जाना जाता रहा है। शैक्षिक और आर्थिक पिछडे़पन से यहां कृषि विकास उतना नहीं था। झांसी में एक बड़ा भूमि क्षेत्र बंजर हुआ करता था। इसके साथ ही हर साल सूखा पड़ने से बंजर क्षेत्र बढ़ता गया। इसके चलते बड़ी संख्या में किसानों की फसल खराब होती थी और वे मौत को गले तक लगा लेते। बीते कुछ सालों में कृ षि क्षेत्र में हुए बदलावों का असर यह पड़ा कि झांसी में बंजर क्षेत्र कम होने लगा है।
हाल ही में कृषि विश्वविद्यालय ने रिमोट सेंसिंग और भौगोलिक सूचना प्रणाली की उन्नत तकनीकों का उपयोग करते हुए पिछले दो दशक में फसल भूमि, निर्माण क्षेत्र, जल निकाय, बंजर भूमि और जंगल पर अध्ययन किया। इसमें 2001 के लिए लैंडसेट-5 थीमैटिक मैपर से सेटेलाइट इमेज ली गई। फिर लैंडसेट-7 एंहांस्ड थीमैटिक पेपर और 2020 के लिए लैंडसेट-8 का उपयोग भूमि का उपयोग निकालने के लिए किया गया। इसके बाद खेती, निर्माण, जल निकाय, बंजर भूमि, जंगल की पहचान की गई।
सेटेलाइट इमेज का बारीकी से मूल्यांकन करने पर सामने आया कि झांसी जिले में बंजर भूमि 27.55 फीसदी कम हो गई है। जबकि, फसल भूमि में 27.16 फीसदी का इजाफा हुआ है। यानी कि किसान अब ज्यादा जमीन पर खेती कर रहे हैं या फिर जल स्रोत के रूप में उपयोग कर रहे हैं। अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों ने बताया कि चूंकि, पड़ताल में फसल भूमि और जल निकाय में इजाफा हुआ है। ऐसे में बंजर भूमि का उपयोग इन्हीं में किया जा रहा है। किसानों ने बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाया है। अध्ययन में विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ फॉरेस्ट्री के हेड डॉ. मनमोहन डोबरियाल, उद्यानिकी एवं वानिकी कॉलेज के डीन डॉ. एके पांडेय, डॉ. पवन कुमार शामिल रहे।
क्षेत्र इजाफा
निर्मित क्षेत्र 0.58 फीसदी
जल निकाय 0.30 फीसदी
अध्ययन में पता चला है कि झांसी में 27 फीसदी बंजर भूमि कम हुई है। जबकि, इतनी ही खेती की जमीन बढ़ी है। इससे स्पष्ट है कि लोग बंजर भूमि का उपयोग कृषि योग्य भूमि बनाने और जल स्त्रोत के रूप में कर रहे हैं। - डॉ. पवन कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर, फॉरेस्ट्री बायोलॉजी एंड ट्री इंप्रूवमेंट डिपार्टमेंट, कृषि विवि।