फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राहत: मेडिकल कॉलेज में मिलेगी जंबो प्लेटलेट्स

विज्ञापन
विज्ञापन
राहत: मेडिकल कॉलेज में मिलेगी जंबो प्लेटलेट्स
विज्ञापन

झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में अब डेंगू के मरीजों के लिए बहुत अहम जंबो प्लेटलेट्स मिलेंगी। पिछले साल ही कॉलेज में आई एफेरेसिस मशीन से ये संभव हो सकेगा। एक बार जंबो प्लेटलेट्स चढ़ाने पर मरीज की 50 से 60 हजार प्लेटलेट्स बढ़ जाती हैं।
डेंगू से स्थिति गंभीर होने पर मरीजों की प्लेटलेट्स तेजी से कम होने लगती हैं। प्लेटलेट्स का काम ब्लड क्लॉटिंग है यानी बहते खून पर थक्का जमाना। ताकि, ज्यादा खून न बहे। बताया गया कि इनकी संख्या 20 हजार के आसपास बचे तो शरीर के अंदर ही खून बहने लगता है। शरीर में बहते-बहते ये खून नाक, कान, यूरिन आदि से बाहर आने लगता है। ऐसे में समय पर प्लेटलेट्स चढ़नी बहुत जरूरी है। वहीं, इस बार से डेंगू के मरीजों को मेडिकल कॉलेज में ही जंबो प्लेटलेट्स की सुविधा मिलेगी। कोरोना काल में पिछले साल खरीदी गई एफेरेसिस मशीन जंबो प्लेटलेट्स अलग करने का काम करेगी। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि जंबो प्लेटलेट्स के लिए शासन की तरफ से भेजी गई किट खत्म हो गई हैं। किट की मांग भेजी जा रही है। वहीं, तब तक मरीजों को खुद इसकी किट खरीदकर लानी होगी। प्लेटलेट्स निकालने का कोई चार्ज नहीं लगेगा। उन्होंने बताया कि एक बार जंबो प्लेटलेट्स चढ़ाने पर मरीज के शरीर में लगभग 50 से 60 हजार प्लेटलेट्स बढ़ जाती हैं।
विज्ञापन

महीने में दो बार डोनेट कर सकते जंबो प्लेटलेट्स
पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मयंक सिंह ने बताया कि रक्तदान हर चार महीने में किया जाता है यानी कि एक साल में तीन बार ही रक्तदान (होल ब्लड) किया जा सकता है। जबकि, महीने में दो बार और साल में 24 बार तक जंबो प्लेटलेट्स दान कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि पांच दिनों में प्लेटलेट्स स्वत: नष्ट होकर फिर से बन जाती हैं।
विज्ञापन

जल्द जांचें हों, तुरंत मिले इलाज
मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रीशियन सेमिनार हॉल में डेंगू के बढ़ते मामलों पर प्राचार्य ने बाल रोग, मेडिसिन, माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी विभाग के डॉक्टरों की बैठक बुलाई। इस दौरान डेंगू मरीज के इलाज के लिए रणनीति बनाई गई। कहा गया कि जल्द से जल्द डेंगू संभावित मरीज की जांच रिपोर्ट आ जाए। वहीं, कोई भी मरीज गंभीर लगता है तो उसे तुरंत भर्ती कर इलाज किया जाए। डॉक्टरों ने भी अपनी तरफ से सुझाव दिए। इस दौरान डॉ. नूतन अग्रवाल, डॉ. ओमशंकर चौरसिया, डॉ. आराधना कनकने, डॉ. मयंक सिंह, डॉ. अनुज सेठी, डॉ. एमएल आर्या, डॉ. नमिता श्रीवास्तव, डॉ. कुलदीप चंदेल, डॉ. नुपुर मौजूद रहीं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें