झांसी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए अंतिम तौर पर सीटों का आरक्षण कर दिया गया। सबसे बड़ा बदलाव जिला पंचायत सदस्य की सीटों पर हुआ है। जनपद में जिला पंचायत की कुल 24 सीटों में 15 का आरक्षण बदल गया। बड़ी संख्या मेें सीटों के बदलाव के राजनीतिक निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं। वहीं, अंतिम आरक्षण तय होने के बाद विपक्षी खेमे के तमाम नेता चुनावी मैदान से पहले ही बाहर हो गए।
ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्यों की सीटों के लिए 20 मार्च को आंतरिम आरक्षण प्रकाशित किया गया था। 23 मार्च तक इनके लिए आपत्तियां ली गईं। डीपीआरओ कार्यालय के मुताबिक कुल 477 आपत्तियां आईं, जिनमें 470 आपत्तियां सिर्फ ग्राम प्रधान पद के लिए बताई गईं। इन आपत्तियों के निस्तारण के बाद शुक्रवार को अंतिम आरक्षण तय किए गए। अमूमन अंतिम आरक्षण में इक्का-दुक्का सीटों में बदलाव होता है लेकिन, आज अंतिम सूची प्रकाशित होते ही जिला पंचायत की राजनीति की पूरी तस्वीर ही पलट गई।
जिपं की 24 सीटों में आश्चर्यजनक तरीके से 15 सीटों का आरक्षण बदल गया। जिन सीटों के आरक्षण बदले गए, उनमें अधिकांश सीटों पर तगड़ी लड़ाई की उम्मीद जताई जा रही थी लेकिन, अब अलग अंदाज में इन सीटों के आरक्षित हो जाने से विपक्षी खेमा चुनावी मैदान से ही बाहर हो गया। मोंठ ब्लॉक में पूंछ, साकिन और भरोसा जैसी सीटों पर तगड़ी लड़ाई की उम्मीद थी। पूंछ निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिमा यादव की सीट रही है। आंतरिम आरक्षण में यह सीट सामान्य थी लेकिन, अंतिम आरक्षण में सीट अनुसूचित जाति के खाते में डाल दी गई।
इसी तरह भरोसा की सीट महिला को दी गई थी लेकिन, अंत में इसे अनुसूचित कोटे में दे दिया गया। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में सीटों में बदलाव से अफसरों की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। आला अफसरों का दावा था कि शासनादेश के मुताबिक आरक्षण तय किया गया लेकिन, पचास फीसद से भी अधिक बदलाव का सीधा जवाब अब अफसर भी नहीं दे पा रहे हैं। वहीं, व्यापक पैमाने पर आरक्षण में हुए बदलाव को लोग विकास भवन में बृहस्पतिवार को भाजपा नेताओं के जमावड़े से भी जोड़ रहे हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट अनुसूचित जाति को आरक्षित हुई है। जिपं सदस्यों के लिए राजनीतिक दल अपने उम्मीदवार खड़ा करने की तैयारी में हैं। जिपं सदस्यों का चुनाव ही राजनीतिक दलों के लिए एसिड टेस्ट होने जा रहा है।
इन सीटों के आरक्षण में हुआ बदलाव
वार्ड आंतरिम आरक्षण की स्थिति अंतिम आरक्षण
पूंछ सामान्य अनुसूचित जाति
साकिन महिला अनुसूचित जाति
भरोसा महिला अनुसूचित जाति
सेमरी पिछड़े वर्ग महिला पिछड़ा वर्ग
बघेरा अनुसूचित जाति सामान्य
भोजला पिछड़ा वर्ग अनुसूचित जाति
रक्सा सामान्य पिछड़ा वर्ग
बबीना रुरल पिछड़ा वर्ग महिला
सकरार अनुसूचित जाति अनुसूचित जाति महिला
बंगराधवा अनुसूचित जाति अनुसूचित जाति महिला
देवरीसिंह पुरा सामान्य पिछड़ा वर्ग
चुरारा अनुसूचित जाति महिला अनुसूचित जाति
मारकुआं पिछड़ा वर्ग पिछड़ा वर्ग महिला
ककरबई अनुसूचित जाति महिला
बिलाटीकरके अनुसूचित जाति महिला अनुसूचित जाति
जिपं सदस्य की इन सीटों में नहीं हुआ बदलाव
पहाड़ीबुजुर्ग, राजापुर, खैलार, भदरवारा, स्यावरी, सिमरधा, भस्नेह, कुरैठा
अनुसूचित जनजाति की आबादी न होने से बदला दो प्रधानों का आरक्षण
जनपद में अनुसूचित जनजाति की आबादी न होने से दो ग्राम प्रधान सीटों का अंतिम आरक्षण भी बदला गया है। आंतरिम आरक्षण में बबीना ब्लॉक की पृथ्वीपुरन नयाखेड़ा को अनुसूचित जनजाति महिला जबकि मुरारी को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया गया था। इस वर्ग को आरक्षित होने पर आपत्तियां दर्ज कराई गईं। इस पर एसडीएम, तहसीलदार समेत एडीओ पंचायत से रिपोर्ट मांगी गई। रिपोर्ट में बताया गया कि अनुसूचित जनजाति की कोई आबादी जनपद में निवास नहीं करती। इस रिपोर्ट के आधार पर इन दोनों सीटों के आरक्षण में बदलाव कर दिया गया। पृथ्वीपुरन नयाखेड़ा को सामान्य जबकि मुरारी ग्राम प्रधान पद को महिला के लिए आवंटित किया गया है। इसी तरह बबीना वार्ड के क्षेत्र पंचायत सदस्य 23 को भी एसटी महिला के बजाए महिला के आरक्षित किया गया है।