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झांसी जेल: राईटर बनाने के लिए अफसर वसूलते थे हर माह पांच से दस हजार, बंदियों ने खोला खेल का कच्चा-चिठ्ठा

Thu, 16 Oct 2025 11:07 AM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी

सार

जांच कमेटी ने जेल अफसरों, बंदी समेत 30 लोगों के बयान दर्ज किए। इनमें सात दोष सिद्ध एवं विचाराधीन बंदी शामिल थे। सभी ने यह बात बताई कि जेल के अंदर हर सुविधा की रकम तय है। जेल प्रशासन बंदियों की देखरेख के लिए उनके बीच से राइर्टर बनाता है।
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जिला कारागार, झांसी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झांसी जेल में सुसाइड मामले की जांच के लिए गठित कमेटी के सामने पेश हुए बंदियों ने जेल की ऊंची दीवारों के पीछे चल रहे खेल का पूरा कच्चा-चिठ्ठा खोलकर रख दिया। बंदियों ने खुलकर बताया कि जेल के भीतर हर काम की फीस तय है। यहां तक कि अफसर अपनी मदद के लिए जिन बंदियों को राईटर बनाते थे, उनसे भी हर माह मोटी वसूली होती है। यह अब जांच रिपोर्ट का दस्तावेजी हिस्सा है। जांच कमेटी भी बंदियों की बातों से सहमत होती नजर आई लेकिन हैरानी की बात यह कि अभी तक किसी जेल अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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जेल के अंदर हर सुविधा की रकम तय

मऊरानीपुर के टिकरी गांव निवासी करन कुशवाहा ने 30 सितंबर 2024 को बैरक के बाहर गमछे से फंदा लगाकर जान दे दी थी। इस मामले में तत्कालीन जेल अफसरों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। मामले की जांच किशोर न्याय बोर्ड के न्यायाधीश को सौंपी गई। जांच कमेटी ने जेल अफसरों, बंदी समेत 30 लोगों के बयान दर्ज किए। इनमें सात दोष सिद्ध एवं विचाराधीन बंदी शामिल थे। सभी ने यह बात बताई कि जेल के अंदर हर सुविधा की रकम तय है। जेल प्रशासन बंदियों की देखरेख के लिए उनके बीच से राईटर बनाता है। राईटर बनाने के लिए हर महीने पांच हजार से दस हजार रुपये तक वसूले जाते हैं। कोई राईटर बनने के लिए साढ़े तीन हजार रुपये भी देता था। राईटर को बैरक में रहने वाले कैदियों का पैसा रखने को मिलता है। तकरीबन सभी बंदियों ने यह बताया कि करन भी राईटर था। वह वसूली करके पैसा जेल अफसरों तक नहीं पहुंचा सका। इस वजह से उसके साथ अफसरों ने मारपीट की।

रिपोर्ट जनवरी में ही सौंपी, लेकिन कार्रवाई नहीं

घटना के समय सभी बंदियों को बैरक में बंद कर दिया गया था। जांच कमेटी के सामने तत्कालीन जेलर कस्तूरी लाल गुप्ता, डिप्टी जेलर जगवीर सिंह चौहान एवं रामनाथ मिश्रा का नाम उजागर हुआ। जांच कमेटी ने जिलाधिकारी एवं एसएसपी को यह रिपोर्ट जनवरी माह में ही सौंप दी थी। अभी तक कार्रवाई न होने पर मंगलवार को पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने इस मामले को फिर उजागर किया। पूर्व आईपीएस ने उस दौरान यहां तैनात रहे वरिष्ठ जेल अधीक्षक विनोद कुमार सोनी के तबादले की भी मांग की।
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