झांसी। करीब 14 साल बाद अब जाकर झांसी में एक नए रेशम क्लस्टर को मंजूरी मिली है। मऊरानीपुर ब्लॉक के बुखारा गांव में प्रस्तावित क्लस्टर को शासन ने मंजूर कर दिया। अब यहां 27 एकड़ जमीन पर कोकून उत्पादन होगा। इसके लिए पूरे इलाके में अर्जुन के तीस हजार से अधिक पौधे रोपे जाएंगे। करीब तीन साल बाद यहां रेशम कीट पालन आरंभ हो सकेगा।
झांसी में वर्ष 2008 में घिसौली, बदनपुर एवं कटेरा देहात में रेशम कलस्टर मंजूर हुए थे। इसकेबाद से रेशम विभाग नए क्लस्टर का प्रस्ताव शासन को लगातार भेज रहा था लेकिन, वर्षों तक मामला अटका रहा। अब जाकर रेशम विभाग के प्रस्ताव को सरकार ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मंजूरी दी है। जिला रेशम अधिकारी एके राव के मुताबिक मऊरानीपुर ब्लॉक के बुखारा गांव में नए क्लस्टर को हरी झंडी मिल गई है। यहां करीब 27 एकड़ जमीन रेशम विभाग को दी जाएगी। शासन ने करीब 45 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। बजट जारी होते ही यहां बाउंड्रीवॉल समेत अन्य कार्य कराए जाएंगे। उसके बाद पौधरोपण कराया जाएगा। इस इकाई की मदद से किसानों को अतिरिक्त आय हो सकेगी।
इसके बाद यहां 30 हजार अर्जुन के पौधे रोपे जाएंगे। हर तिमाही करीब एक लाख रेशम कीट उत्पादन का लक्ष्य है लेकिन, इस उत्पादन में करीब तीन साल का समय लगेगा। अर्जुन के पेड़ पर रहने वाले रेशम कीट टसर रेशम का उत्पादन करते हैं।
190 एकड़ में फैला है रेशम का रकबा
झांसी में अभी कुल 190 एकड़ क्षेत्रफल में रेशम कीट का पालन होता है हालांकि यहां रेशम के धागे नहीं निकाले जाते। रेशम अधिकारियों के मुताबिक इस पूरे इलाके में सिर्फ अर्जुन के पौधे लगे हैं। इनमें रेशम कीट पाले जाते हैं। जैसे ही कोकून बनने की प्रक्रिया पूरी होती है, उसे छोटा नागपुर, रांची, पश्चिम बंगाल आदि इलाकों में भेज दिया जाता है। रेशम के धागे निकालने का काम इन्हीं इलाकों में होता है।