मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में अब फर्जीवाड़ा नहीं किया जा सकेगा। इस योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने वर-वधु के लिए विवाह से पहले बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया है। इससे पात्र लाभार्थियों की सही पहचान हो सकेगी। यदि कोई व्यक्ति पहले इस योजना का लाभ ले चुका होगा तो उसकी जानकारी भी तुरंत उपलब्ध हो जाएगी।
गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में पहले फर्जी दस्तावेजों के जरिए लाभ लेने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई बार जांच में ऐसे मामले पकड़े भी गए हैं। इस प्रकार की गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए अब वर-वधु के आधार का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा।
विवाह से पहले बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होगा और विवाह स्थल पर भी दोनों की उपस्थिति बायोमेट्रिक माध्यम से दर्ज की जाएगी। इसके बाद ही योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा। अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं। जहां 100 या उससे अधिक जोड़ों का सामूहिक विवाह होगा, वहां उप-जिलाधिकारी की उपस्थिति अनिवार्य होगी। इसके अलावा दूसरे जिलों के अधिकारियों को पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया जाएगा, जो किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में सीधे निदेशालय को रिपोर्ट करेंगे।
बीते वर्ष लक्ष्य से अधिक विवाह, इस साल अब तक एक भी नहीं
पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में झांसी जनपद को 1048 जोड़ों के विवाह का लक्ष्य मिला था, जबकि 1102 जोड़ों के विवाह सफलतापूर्वक संपन्न कराए गए। इस वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 524 जोड़ों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हालांकि छह महीने बीत चुके हैं, अब तक एक भी विवाह नहीं हो सका है। विभाग को अब तक 458 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। पात्रता जांच के बाद लाभार्थियों का चयन किया जाएगा।
एक जोड़े पर अब खर्च होंगे 1 लाख रुपये
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में पहले एक जोड़े पर 51,000 रुपये का व्यय किया जाता था। इसमें 10,000 रुपये का सामान, 6,000 रुपये आयोजन व्यय और 35,000 रुपये वधु के खाते में दिए जाते थे। अब यह राशि बढ़ाकर 1,00,000 रुपये कर दी गई है। इसमें 25,000 रुपये का सामान, 15,000 रुपये आयोजन व्यय तथा 60,000 रुपये वधु के खाते में सीधे भेजे जाएंगे।
जिला समाज कल्याण अधिकारी ललिता यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए शासन के सभी निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाएगा। विवाह बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही संपन्न होंगे। इससे फर्जीवाड़े की शिकायतों पर प्रभावी अंकुश लगेगा।