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‘बेन सर्किट’ के नए स्वरूप को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज द्वारा गंभीर मरीजों के पुनर्जीवन के लिए नई तरह का बेन सर्किट बनाया गया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय एनेस्थीसिया रिसर्च सोसाइटी के जनरल एनेस्थीसिया एनलजीशिया के अक्तूबर अंक में इनोवेशन के रूप में प्रकाशित किया गया है। ये शोध पत्रिका अमेरिका से प्रकाशित होती है।
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पिछले पांच सालों में पहली बार भारत के किसी आविष्कार को इस शोध पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। मुख्य शोधकर्ता डॉ. अंशुल जैन ने बताया कि कई बार गंभीर मरीजों को तुरंत पुनर्जीवन की जरूरत होती है, जिसके लिए मरीज को आमतौर पर बेन सर्किट से ऑक्सीजन दी जाती है। मगर सामान्य बेन सर्किट के इस्तेमाल के दौरान यदि किसी मरीज को कोई संक्रमण है और वो वायरस, बैक्टीरिया मरीज की सांस में आ रहा है तो वो बेन सर्किट के वाल्व से वातावरण में आ जाता है। साथ ही चिकित्सा कर्मियों को संक्रमित कर सकता है। कोविड के दौरान ये समस्या काफी बिगड़ गई थी, क्योंकि कई बार मरीज को खुद नहीं पता होता है कि वो कोरोना संक्रमित है। मगर उसकी सांस से निकले हुए वायरस से बाकी लोग संक्रमित हो जाते हैं। बेन सर्किट नामक इस नवीन आविष्कार में एक नए किस्म के वाल्व का प्रयोग किया गया है। उसके ऊपर हेपा फिल्टर लगाया गया है, जो सारे बैक्टीरिया व अधिकतर वायरस को फिल्टर कर देता है। यदि मरीज की सांस से कोई वायरस, बैक्टीरिया निकल भी आता है तो वो वातावरण में नहीं पहुंच पाता है। इस डिवाइस के पेटेंट के लिए भी आवेदन किया गया है।
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