संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। जिले में दम तोड़ रहे उद्योगों के लिए इंवेस्टर्स समिट संजीवनी के समान साबित हुई। पांच साल में औद्योगिक इकाइयों में छह गुना इजाफा हुआ है। साथ ही रोजगार के अवसर भी 10 गुना तक बढ़े। वित्तीय वर्ष 2020-21 में 9,413 औद्योगिक इकाइयां थीं, जो 2024-25 में बढ़कर 55,731 पहुंच गई हैं।
औद्योगिक इकाइयों को विस्तार देने के लिए मई 2020 में लाई गई कलस्टर प्लग और प्ले योजना का प्रदर्शन जिले में शानदार रहा। सूक्ष्य, लघु एवं मध्य उद्यमों की संख्या कोरोना काल के बाद से जिले में बढ़कर 55 हजार से अधिक हो गई है। आंकड़ों पर गौर करें तो योजना की शुरुआत में वर्ष 2020 में 9,413 उद्यम जिले में संचालित थे। इसके बाद से नीतियों में लगातार हुए बदलाव और बैंक के ब्याज दरों में कटौती से निवेशकों ने यहां निवेश में रुचि दिखाई। परिणामस्वरूप जिले में पांच सालों में उद्योग इकाइयों की संख्या बढ़कर 55,731 हो गई है। इकाइयों के स्थापित होने से आसपास के जिलों के लोगों को रोजगार के अवसर भी मिले।
रोजगार की संख्या में भी 10 गुना वृद्धि
एमएसएमई के क्षेत्र में कोरोना काल के बाद लगातार हुए विस्तार से उद्यमों की संख्या बढ़ती चली गई। वर्ष 2020-21 में कुल 39,786 लोग कार्यरत थे। रोजगार के अवसर सृजित होने के बाद यह संख्या बढ़कर 3,08,511 तक पहुंच गई है। ऐसे में रोजगार की संख्या में 10 गुना वृद्धि हुई है।
महिला उद्यमियों की संख्या भी बढ़ी
पहले उद्योग क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी कम होती थी, लेकिन समय के बदलाव के साथ लोगों की सोच बदली है। महिलाएं भी अब पुरुषों के साथ बराबर हिस्सेदारी करते हुए उद्योग क्षेत्र में आगे आईं। आंकड़ों पर नजर डालें तो औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं की संख्या न के बराबर रहती थी। लगातार औद्योगिक क्षेत्रों में हुए निवेश से महिलाओं ने भी नीतियों का लाभ लेने में रुचि दिखाई। इसके बाद, लगातार यह वृद्धि होती गई और वर्तमान में औद्योगिक इकाइयों में महिलाओं की संख्या 10 हजार से अधिक पहुंच गई है।
तीन महीने में बिगड़ गई थी आर्थिक स्थिति
- कोरोना महामारी के समय करीब तीन महीने तक चले लॉकडाउन के चलते औद्योगिक यूनिट ठप हो गई थीं। ऐसे में इसका भार यूनिट के साथ सर्वाधिक श्रमिकों पर पड़ा। जिले में ज्यादातर श्रमिक बाहर के होने से उन्हें पलायन करना पड़ा। वहीं, जिले के श्रमिक भी बेरोजगार हो गए। ऐसे में फिर से शुरू हुई औद्योगिक यूनिट से उन्हें रोजगार मिला है।
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शासन की ओर से चलाई गई योजनाओं और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने से निवेशकों की संख्या बढ़ गई है। वहीं, महिलाओं की भागीदारी भी इससे काफी अधिक बढ़ गई है। यह सब नीतियों के सरल होने के बाद से हुआ है। - मनीष चौधरी, उपायुक्त, जिला उद्योग केंद्र, झांसी