नोटबंदी के बाद भूमि और फ्लैट की खरीद-फरोख्त में सरकारी राजस्व को चूना लगाने वालों पर आयकर विभाग शिकंजा कसने की तैयारी में जुट गया है। विभाग ने ऐसे लोगों की जानकारी बैंकों और रजिस्ट्री कार्यालय से एकत्रित की है। इनमें झांसी- ललितपुर परिक्षेत्र के सात सौ से अधिक ऐसे मामलों को छांटा गया, जिनमें तीस लाख से ऊपर संपत्ति खरीदने के बाद आयकर विभाग को सूचना नहीं दी गई। इन सभी को नोटिस भेजे जा रहे हैं।
भारत सरकार ने वित्तीय सत्र 2016-17 में काले धन को बाहर निकालने के लिए दो बड़ी मुहिम देश में चलाईं थीं। इसमें अघोषित आय घोषणा और दूसरा नोटबंदी थे। आठ नवंबर 2016 के बाद से नोटबंदी चालू हो गई। इसके पहले फ्लैट और जमीन खरीद की दरें बेहद मंहगी चल रही थीं। नोटबंदी लागू होने के बाद जमीन खरीद-फरोख्त के कारोबार पर जैसे ब्रेक लग गया था। संपत्ति खरीदने के लिए लोगों के पास नकद रुपये नहीं थे और बैंक से कर्जा लेना लोगों को महंगा लग रहा था। मगर, इसके बाद भी झांसी-ललितपुर परिक्षेत्र में 2017- 18 में सात सौ से अधिक ऐसे लोग थे, जिन्होंने 30 लाख से अधिक की संपत्तियां खरीदीं और जानकारी आयकर विभाग को नहीं दी।
चूंकि, आयकर विभाग को तीस लाख से अधिक की संपत्ति खरीदने या बेचने की जानकारी देना भी जरूरी है। विभाग ने ऐसे लोगों की जानकारी बैंकों और रजिस्ट्री कार्यालय से एकत्रित की है। इन सभी को नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिन्होंने संपत्ति खरीदने या बेचने के बाद जानकारी विभाग को नहीं दी।
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केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के आल इंडिया कॉस्ट इंडेक्स रूल के हिसाब से अगर किसी व्यक्ति ने बीस साल पहले कोई जमीन एक लाख रुपये में खरीदी थी और आज उसकी कीमत पांच लाख हो गई है। ऐसे में वह व्यक्ति पांच लाख की कीमत की जमीन को नौ लाख रुपये में बेच देता है, तो विक्रेता को चार लाख रुपये पर बीस प्रतिशत की दर से इनकम टैक्स जमा करना होगा। इसी तरह अगर कोई व्यक्ति छत्तीस महीने के अंदर जमीन खरीदता और उसे बेचता है तो ऐसे में जमीन खरीदने के बाद बेची गई राशि में जो अंतर होगा, उस पर टैक्स देना होगा।