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झांसी-ललितपुर में 71 दिनों में 76 लोगों ने की खुदकुशी, 500 कर चुके मरने की कोशिश

Sun, 13 Mar 2022 01:21 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, झांसी

सार

डाउन टू अर्थ मैगजीन और सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार आत्महत्या करने वाले अन्य लोगों से अलग भारत में हर दिन 28 से अधिक किसान और मजदूर आत्महत्या कर रहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social media
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विस्तार
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शहर कोई भी हो, कोरोना काल के बाद से आत्महत्या करने वालों की संख्या साल-दर-साल बढ़ती जा रही है। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक अकेले झांसी और ललितपुर जिले में जनवरी से लेकर अब तक 71 दिनों में 76 लोगों ने आत्महत्या कर ली। वहीं, 500 से अधिक लोग मरने की कोशिश कर चुके। ऐसे में मनोवैज्ञानिकों की मानें तो शरीर की बीमारी का पता लगाने के लिए ईसीजी और एमआरआई करा रहे हैं तो मनोवैज्ञानिकों से मिलकर अपने मन की जांच जरूर कराएं, इससे पर्सनालिटी डिस्आर्डर और नकारात्मक सोच से दूर रहने में मदद मिल सकती है और कुछ हद तक आत्महत्याएं रोकी जा सकती हैं।

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हाल ही में डाउन टू अर्थ मैगजीन और सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार आत्महत्या करने वाले अन्य लोगों से अलग भारत में हर दिन 28 से अधिक किसान और मजदूर आत्महत्या कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2019 में 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5957 किसानों 4324 मजदूरों ने आत्महत्या की। नौ राज्यों में आत्महत्या करने वाले किसानों और मजदूरों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश भी शामिल है।

नकारात्मक विचार आएं तो कराएं 16-पीएफ टेस्ट
झांसी मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र के मनोवैज्ञानिक बता रहे हैं कि किसी के मन में अगर नकारात्मक विचार आ रहा है तो तुरंत 16-पीएफ टेस्ट (सोलह पर्सनालिटी फैक्टर) टेस्ट जरूर कराएं। व्यक्ति या उसके परिवारवाले इस टेस्ट के जरिए संबंधित व्यक्ति के स्वभाव में परिवर्तन की स्थिति, भावनात्मक विचार, डिप्रेशन का स्तर, शक्कीपन मिजाज, चुप रहने का कारण, टेंशन और मानसिक रूप से चल रही उछल-पुथल के साथ उसके मन की स्थिति के बारे में पता कर सकते हैं। यह टेस्ट पचकुइयां स्थित मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र में निशुल्क हो सकते हैं। इसके अलावा पचकुइयां में ही स्थित मनोवैज्ञानिक परीक्षण एवं परामर्श केंद्र में भी डॉक्टर से परामर्श (फीस लगेगी) लेकर टेस्ट करा सकते हैं।
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बच्चों और बड़ों के लिए हैं अलग-अलग टेस्ट
झांसी। मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र झांसी के पूर्व मंडलीय मनोवैज्ञानिक डॉ. एलके सिंह बताते हैं कि यदि किसी के मन में अपना जीवन खत्म करने या जिंदगी को बेकार समझने जैसे विचार आते हैं तो मनोवैज्ञानिकों से मिलकर अपना टैट (थीमैटिक एपरेसेप्शन टेस्ट) करवा सकता है। यह टेस्ट बड़ों के लिए है। इसमें अलग-अलग टेस्ट के जरिए व्यक्ति के दिल और दिमाग में चल रही उथल-पुथल को जाना जा सकता है। न्यूरोटिक स्टेज में काउंसलिंग के जरिए व्यक्ति की सोच को पॉजिटिव बनाया जाता है। बच्चों में इस टेस्ट को कैट (चिल्ड्रेन एपरेसेप्शन टेस्ट) कहा जाता है। यह एक मनोवैज्ञानिक परीक्षण होता है।

मनोवैज्ञानिक से काउंसलिंग जरूर लें
झांसी। मनोवैज्ञानिक रश्मि गुप्ता बताती हैं कि झांसी, ललितपुर और आसपास आत्महत्या के केस बढ़ रहे हैं। यहां बेरोजगारी, परिवारों का टूटना, आमदनी कम, खर्च अधिक, नकारात्मक विचारों से घिरना, कर्ज और कलह जैसी कई समस्याओं के कारण लोग परेशान हैं। लेकिन आत्महत्या किसी समस्या का हल नहीं है, विकल्प हजारों हैं। लोग मन की स्थिति पता करने के लिए मनोवैज्ञानिकों के पास जाकर अपनी समस्या बताएं और काउंसलिंग लें तो कुछ हद तक आत्महत्याएं रोकी जा सकती हैं।

समय पर विकल्प तलाश लेते तो बच सकती थी जान
केस-1

गर्भवती पत्नी के नाम पत्र लिखकर ट्रेन से कट गया
झांसी। वर्ष 2021 में 21 जून को छतरपुर के भूपेंद्र यादव ने अपनी गर्भवती पत्नी के नाम पत्र लिखकर ट्रेन से कटकर जान दे दी थी। उसका शव झांसी रेलवे स्टेशन के पास आरआरआई व सी केबिन के मध्य रेल ट्रैक पर मिला था। जेब में मिले पत्र से उसकी पहचान हुई थी। इस व्यक्ति ने दूसरे धर्म की महिला से शादी की थी। लेकिन समाज ने उसे नहीं स्वीकारा। पत्र में युवक ने लिखा था कि वह पत्नी से बहुत प्रेम करता है। वह उसके बच्चे को जन्म दे।

केस-2
सीएम योगी के नाम वीडियो बनाकर जहर खा लिया

झांसी। वर्ष 2022 में 11 फरवरी को बबीना नईपुरा के युवक उमेश सेन ने सीएम योगी को संबोधित एक मिनट का वीडियो बनाकर जहर खा लिया था। इससे उसकी मौत हो गई थी। उसने वीडियो में कुछ लोगों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था। युवक ने सीएम से उसके गुनाहगारों को सजा दिलाने की बात कही थी, लेकिन युवक जहर न खाता और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर करता तो शायद उसकी मदद हो जाती और उसकी जान बच जाती।

केस-3
गृहकलह में ले ली अपनी और दो बच्चों की जान

झांसी। चिरगांव के एक गांव में युवक महेंद्र की पत्नी गृहकलह से इतनी परेशान थी कि उसने अपने दो बच्चों को मारकर खुद भी आत्महत्या कर ली थी। इससे उसका पूरा परिवार तबाह हो गया था। ऐसे में महिला इस मामले में घरवालों से बात करती, अपनी समस्या बताती तो शायद कोई हल निकल आता। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि गृहकलह से बचने का कोई रास्ता निकाला जाता तो महिला और उसके बच्चे बच सकते थे।

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