झांसी। निजी जमीनों पर कब्जे तो आम बात है, लेकिन जिले में जिलाधिकारी की जमीनें भी सुरक्षित नहीं हैं। पुराने राजस्व रिकॉर्ड खंगालने पर इसका खुलासा हुआ है। महानगर में दो ऐसी बेशकीमती जमीनें सामने आईं हैं, जो राजस्व रिकॉर्ड में जिलाधिकारी के पद्नाम से दर्ज पाई र्गई हैं, लेकिन उन पर कब्जा कुछ और लोग किए हुए हैं। यहां तक की इन जमीनों की बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त भी हो चुकी है।
पुराने राजस्व रिकॉर्ड की जांच में प्रेमनगर क्षेत्र में 25 एकड़ जमीन जिलाधिकारी के पद्नाम पर दर्ज पाई गई। इस जमीन का 1924 में ब्रिटिश सरकार में पट्टा एक संस्था के नाम किया गया था। 1954 में पट्टा खत्म हो गया था। इसका संस्था ने नवीनीकरण नहीं कराया था, लिहाजा यह जमीन जिलाधिकारी के नाम दर्ज हो गई थी। बावजूद, इस जमीन की 1964 में दूसरी संस्था को रजिस्ट्री कर दी गई। पड़ताल में सामने आया कि इस जमीन पर स्कूल, दुकान व बैंक भवन का निर्माण कर लिया गया है। इसका किराया भी वसूला जा रहा है। इसी तरह से सीपरी बाजार में 65 एकड़ जमीन जिलाधिकारी के नाम दर्ज पाई गई। यह जमीन 1972 में एक ट्रस्ट से अधिग्रहित कर जिलाधिकारी के नाम दर्ज की गई थी। लेकिन, अब इस जमीन पर दो सौ से अधिक मकान बन चुके हैं। जांच में सामने आया कि इस जमीन की बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त की जा चुकी है।
अब इन जमीनों की कीमतों और सरकार को हुई राजस्व की क्षति का आकलन किया जा रहा है। इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी।
पुराने रिकार्डों की पड़ताल में प्रेमनगर और सीपरी बाजार में दो जमीनें जिलाधिकारी के पद्नाम पर दर्ज पाई गईं हैं, लेकिन कब्जा निजी लोगों का है। इन दोनों जमीनों की कीमतों और राजस्व हुई क्षति का आकलन किया जा रहा है। इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी।
- प्रदीप सक्सेना, जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व)