कोरोना हुआ घातक तो बच्चों को बचाएंगे इम्यूनिटी बढ़ाने वाले इंजेक्शन
झांसी। कोरोना की तीसरी लहर से मुकाबले के लिए महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में तीन महीने की दवाओं का स्टॉक रख लिया गया है। खास बात ये है कि गंभीर हालत में पहुंच जाने वाले बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इम्युनोग्लोबिन इंजेक्शन मिल गए हैं। ये इंजेक्शन पोस्ट कोविड में मल्टी इंफ्लामेट्री सिंड्रोम इन चिल्ड्रन (एमआईएस-सी) या फिर शॉक में चले जाने वाले बच्चों को लगाया जाता है। इससे बच्चे के जल्द स्वस्थ होने में मदद मिलती है।
कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए बेहद खतरनाक बताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक-दो महीने में तीसरी लहर की दस्तक हो सकती है। इससे पहले ही योगी सरकार सारी तैयारियां दुरुस्त कर लेना चाहती है। इसके लिए तेजी से प्रयास भी जारी हैं। सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक की ऊपरी मंजिल पर बच्चों का निक्कू वार्ड तैयार किया गया है। साथ ही तीन महीने की दवाओं का स्टॉक भी कर लिया गया है। इसमें एंटीबायोटिक, बुखार, खांसी, जुकाम, एम्फोटेरेसिन-बी समेत कई दवाएं शामिल हैं। खास बात ये है कि महंगे-महंगे इंजेक्शन भी मंगवाए गए हैं, इसमें इम्युनोग्लोबिन भी है। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि कोरोना से ठीक हो चुके बच्चों में तमाम तरह की गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं। इसे एमआईएस-सी बोलते हैं। इस बीमारी में कभी-कभार बच्चे शॉक में भी चले जाते हैं। ऐसे में इम्युनोग्लोबिन इंजेक्शन लगाने पर बच्चे की इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने लगती है। फिर धीरे-धीरे बच्चा स्वस्थ हो जाता है। एक इंजेक्शन की कीमत दस से बारह हजार रुपये होती है। इलाज में आठ से दस इंजेक्शन तक लग जाते हैं। ऐसे में हर किसी के बस में इसकी खरीद कर पाना मुश्किल होता है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में 10 से 12 लाख रुपये के इंजेक्शन उपलब्ध हैं।
सर्जिकल सामान भी आ रहा
दवाओं के साथ-साथ पिक्कू वार्ड के लिए सर्जिकल सामान भी मंगवाया जा रहा है। इसमें वेंटिलेटर सर्किट, हाई फ्लो ऑक्सीजन मास्क, नेजल प्रोंग्स आदि शामिल हैं। जल्द ही ये भी उपलब्ध हो जाएगा। इसके अलावा वाई पैप, सी पैप, ईको मशीन भी आ रही हैं।
400 डॉक्टर, स्टाफ नर्स को दी ट्रेनिंग
तीसरी लहर के लिए डॉक्टर और स्टाफ नर्स को भी तैयार किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में अब तक 400 लोगों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। उन्हें मॉनीटरिंग, सीपीआर, मशीनों के संबंध में जानकारी दी गई है। इसके अलावा भविष्य में जरूरत पड़ने पर रखे जाने वाले आउटसोर्सिंग स्टाफ को भी ट्रेनिंग दी गई है।
तीसरी लहर से पहले बच्चों के इलाज से संबंधित तीन महीने की दवाओं का स्टॉक रख लिया गया है। साथ ही सर्जिकल सामान और मशीनें भी आ रही हैं। सारी तैयारियां समय से पूरी कर ली जाएंगी। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज