झांसी। शादी से पहले ज्यादातर लोग अपने बच्चों की कुंडली मिलवाते हैं। सब कुछ सही मिलने पर शादी कर दी जाती है। मगर बहुत कम लोग ऐसे होते हैं, जो बच्चों की स्वास्थ्य कुंडली मिलवाते हैं। वह युवक-युवती की खून की जांच कराकर पता कर लेते हैं कि किसी को कोई गंभीर बीमारी तो नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सभी लोग स्वास्थ्य कुंडली बनवाने लगें तो थैलेसीमिया जैसे आनुवंशिक रोगों को बढ़ने से रोका जा सकता है।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में बने थैलेसीमिया सेंटर में अभी 60 मरीज पंजीकृत हैं। बताया गया कि हर साल इस बीमारी के 15 से 20 नए मरीजों का रजिस्ट्रेशन होता है। इनकी उम्र छह महीने से पांच साल तक होती है। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि हीमोग्लोबिन अल्फाग्लोबिन और बीटाग्लोबिन प्रोटीन से बनता है और इन प्रोटीन में ग्लोबिन निर्माण की प्रक्रिया में खराबी होने से थैलेसीमिया होता है। इसमें लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से नष्ट हो जाती हैं।
हीमोग्लोबिन की काफी कमी हो जाने पर रोगी को बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है। माता-पिता दोनों के जींस में ये बीमारी होने पर बच्चे को मेजर थैलेसीमिया होता है। वहीं, माइनर थैलेसीमिया उन बच्चों को होता है, जिनके माता-पिता में से किसी एक के जींस में ये बीमारी होती है। उन्होंने कहा कि चूंकि ये आनुवंशिक रोग है, ऐसे में यदि शादी से पहले युवक-युवती की स्वास्थ्य कुंडली मिलवा ली जाए, तो ये रोग होने से रोका जा सकता है।
सेंटर में बिना डोनर के देते ब्लड, दवाएं भी फ्री
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुज सेठी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में बने थैलेसीमिया सेंटर में मरीजों को नि:शुल्क दवाएं दी जाती हैं। साथ ही मरीजों की काउंसलिंग भी की जाती है। वहीं, ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. एमएल आर्या ने बताया कि बिना किसी डोनर के फ्री ल्यूकोफिल्टर ब्लड भी मिलता है।
ये ध्यान रखें
- विवाह से पहले युवक-युवती खून की जांच कराएं।
- गर्भावस्था के दौरान थैलेसीमिया की जांच कराएं।
- रोगी का हीमोग्लोबिन 10 ग्राम प्रतिशत से ज्यादा रखें।
- मरीज समय पर दवाएं लें और पूरा इलाज कराएं।