गणेश चौराहा के पास कैंसर से पीडित महिला सड़क पर ।
झांसी। ‘मैं भूखी और बीमारी से लाचार हूं, कोई मेरी मदद कर दो, मुझे अस्पताल में भर्ती करा दो, कम से कम सरकारी अस्पताल में मुझे दो वक्त की रोटी तो मिल जाएगी...’ पॉलिटेक्निक के पास सड़क पर पड़ी बुजुर्ग महिला आते-जाते लोगों से यही गुहार लगा रही है। लगभग एक साल से मुंह के कैंसर से जूझ रही महिला सड़क पर गर्मी और तेज धूप से बिलबिला रही है।
पॉलिटेक्निक गणेश चौराहे के पास रामदास गर्ल्स हॉस्टल वाली सड़क पर करीब 50 वर्षीय एक महिला अनीता मंगलवार से आते-जाते लोगों से मदद की गुहार लगा रही है। महिला का कहना है कि वह इसी सड़क पर एक मकान में किराए पर रह रही थी। पति की मौत के बाद वर्ष 2019-2020 में लॉकडाउन के समय भोपाल में एक घर में खाना बनाने का काम करती थी। काम छूटने के बाद झांसी लौट आई। इसके बाद लोगों के घरों में चौका-बर्तन करने लगी और इससे जो पैसा मिलता था उसी से मकान का किराया और उसका खाना-पीना हो जाता था।
कुछ महीने पहले पता लगा कि उसे मुंह का कैंसर हो गया है। महिला ने बताया कि जब तक उसके पास काम था, वह जैसे-तैसे अपनी दवा कराती रही। बीमारी और लॉकडाउन के चलते तीन-चार महीने से उसे कोई काम नहीं मिला। वह मकान का किराया भी दे पाई। इससे मकान छोड़ना पड़ा और वह सड़क पर आ गई। अब उसके पास खाने तक के लाले हैं। रोती बिलखती महिला बताती है कि कैंसर का आकार बढ़ रहा है और वह मुंह के बाहर आ रहा है। असहनीय दर्द जब जानलेवा हो जाता है तो वह मुंह पर कसकर कपड़ा बांध लेती है ताकि दर्द की टीस कम हो जाए। उधर, आसपास के कुछ लोग उसे खाना, दूध-चाय देकर मदद कर रहे हैं। महिला उसे अस्पताल में भर्ती कराने की गुहार लगा रही।
मुंबई गए एक बेटे ने आने से मना किया, दूसरा बेरोजगार
महिला के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा मुंबई में काम करता है, लेकिन बुलाने के बाद भी उसने आने से मना कर दिया। वहीं महिला का दूसरा बेटा शोभित बेरोजगार है, उसकी गृहस्थी भी तंगहाल है। शोभित ने बताया वह हलवाई का काम करता था। लॉकडाउन में काम छूट गया। तब से वह बेरोजगार है, मां का इलाज नहीं करा पा रहा है। मकान का किराया देना भी मुश्किल हो रहा।