झांसी। जिस दौर में फिल्म निर्माता अंग्रेजी जुबान के बिना बात नहीं करते थे और उर्दू अलफाजों के बिना गीतकारों के गीत पूरे नहीं होते थे, उस दौर में भी बुंदेलखंड के सपूत इंदीवर फिल्मी गीतों में हिंदी के लिए संघर्ष करते हुए लिख रहे थे- है प्रीत जहां की रीत सदा मैं गीत वहां के गाता हूं, भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं...। कई बार निर्माता और संगीतकारों से गीतों में हिंदी के प्रयोग को लेकर उनके मतभेद भी हुए पर वह हिंदी के लिए अडिग रहे। उस दौर में जब गीतों में नब्बे फीसदी उर्दू और दस फीसदी हिंदी का चलन था तब इंदीवर ने इसके उलट नब्बे फीसदी हिंदी और दस फीसदी उर्दू का प्रयोग कर गीत लिखे। लोग उन्हें इस प्रयोग के दौरान असफलता का भय दिखाकर डराते रहे पर वह डरे नहीं हिंदी के सच्चे सपूत की तरह अडिग रहे और सफलता ने उनके कदम चूमे।
चंदन सा बदन चंचल चितवन गीत को हिंदी कविता बताकर नकार दिया था मुकेश ने
इंदीवर के भतीजे (पत्नी के भाई के बेटे) अजीत राय बताते हैं कि जब इंदीवर जी ने फिल्म सरस्वती चंद्र का गीत - चंदन सा बदन चंचल चितवन धीरे से तेरा ये मुस्काना, मुझे दोष न देना जग वालों हो जाऊं अगर मैं दीवाना, लिखा तो संगीतकार कल्याण जी आनंद जी और गायक मुकेश ने यह कहकर इस गीत को नकार दिया था कि यह हिंदी की कविता है। फिल्म में यह गीत बुरी तरीके से पिट जाएगा। इंदीवर जी पर दबाव था कि वह इसका उर्दू अनुवाद कर दें, पर इंदीवर इसके लिए तैयार नहीं थे। शुद्ध हिंदी के इस गीत को गाने में मुकेश को दिक्कत हो रही थी। फिल्म के निर्माता ने दखल दिया और गीत यथावत हिंदी में ही रहने दिया। जब यह गीत श्रोताओं तक पहुंचा तो सुपर हिट रहा। इसी फिल्म का एक और गीत- ए दर्पण को देखा तूने जब- जब किया श्रृंगार, फूलों को देखा तूने जब- जब आई बहार, भी खूब हिट हुआ था।
रिछारिया महाविद्यालय बरुआसागर की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. शोभा शर्मा का कहना है कि बरुआसागर में जन्मे इंदीवर के गीतों में हिंदी का लालित्य तो है ही विरह का दर्द भी है। इंदीवर का गीत- मैं तो भूल चली बाबुल का देश पिया का घर प्यारा लगे, कोई मैके में दे दो संदेश पिया का घर प्यारा लगे....। आज भी हिंदी कविता को नई ऊंचाई देता है।
इसी तरह मेरे देश की धरती सोना उगले हीरे मोती, गीत में इंदीवर जी का देशभक्ति के साथ हिंदी प्रेम भी उजागर होता है। सरल हिंदी में लिखे गए गीत- मेरी प्यारी बहनिया बनेगी दुल्हनिया सजके आएंगे दूल्हे राजा, भैया राजा बजाएगा बाजा तथा जब कोई तुम्हारा हृदय तोड़ दे तड़पता हुआ जब तुम्हें छोड़ दे..., आओ मिल जाएं हम सुगंध और सुमन की तरह..., जैसे कई हिंदी गीतों को श्रोताओं ने हाथोंहाथ लिया। इंदीवर जी का हिंदी के लिए संघर्ष जीवनपर्यंत चलता रहा।