संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। रंगोत्सव पर्व होली को लेकर सभी ओर उत्साह छाया हुआ है। विभिन्न समाज अपनी-अपनी परंपराओं के साथ यह त्योहार धूमधाम से मनाएंगे। महाराष्ट्रीय, मारवाड़ी, बंगाली, सिंधी, बिहार-पूर्वांचल समाज सहित अन्य सभी परिवारों में होली के अवसर पर परंपरागत पकवान मालपुआ, रसपुआ, श्रीखंड आदि बनाए जा रहे हैं, जो त्योहार पर मेहमानों सहित अन्य सभी का स्वाद बढ़ाएंगे।
बंगाली समाज में पूर्णिमा पर ही होली मनाई जाती है। इसे दोल जात्रा बोलते हैं। बड़े-बुजुर्गों के पैरों में गुलाल डालकर उनसे आशीर्वाद लिया जाता है। घरों में गुझिया, लबंग लतिका आदि पकवान बनाए जाते हैं। - रविशंकर चटर्जी
होली पर सिंधी समाज में गेयर एवं रोट तथा मीठे समोसे बनाए जाते हैं। इसके साथ ही अन्य परंपरागत पकवान भी बनते हैं। होली पर भव्य आकर्षक कार्यक्रम किए जाते हैं। - चंद्रप्रकाश नैनवानी
होली पर महाराष्ट्रीय समाज में श्रीखंड, पूरण पोली आदि पकवान बनाए जाते हैं। महाराष्ट्र गणेश मंदिर में परंपरा के अनुसार भव्य होली उत्सव का आयोजन होगा। इसमें मधुर शास्त्रीय संगीत होगा। - गजानन खानलवलकर
बिहार - पूर्वांचल समाज में होली पर मालपुआ, रसपुआ आदि पकवान बनते हैं। होली बड़े ही उत्साह से खेली जाती है। गेंहू की नई बालियां होलिका दहन में पकाकर घर पर लाई जाती है। - आरके सिंह