जांच के लिए झांसी स्टेशन पर उतारी गई थीं दो नन व दो किशोरियां।
जीआरपी का रहा लापरवाह रवैया, साढ़े तीन घंटे बाद छोड़ा था चारों को
झांसी। धर्मांतरण के लिए ले जाने के संदेह में बीते सप्ताह ट्रेन से उतारी गईं नन व किशोरियों के मामले में जीआरपी की बड़ी लापरवाही सामने आई है। चारों ने पुलिस को अपने - अपने आधार कार्ड दिखाकर तस्दीक करने को कहा था। लेकिन, पुलिस नहीं मानी। चारों को पुलिस लगभग साढ़े तीन घंटे थाने में बैठाए रही। बाद में लखनऊ से उच्चाधिकारी का फोन आने के बाद रात 11 बजे चारों को छोड़ा गया।
पूछताछ के दौरान चारों ने धर्मांतरण जैसी बात से साफ इंकार किया और पहचान की तस्दीक के लिए अपने-अपने आधार कार्ड भी दिखाए। लेकिन, पुलिस ने नजरअंदाज कर दिया। इस दरम्यान किशोरियों ने बताया कि वे दिल्ली के एक चर्च से ट्रेनिंग करके आ रही हैं। इसके उन्होंने कागजात भी दिखाए। साथ ही, व्हाट्सएप के जरिए भी कुछ कागजात मंगाए। उन्होंने एबीवीपी के कार्यकर्ताओं पर सफर के दौरान हंगामा करने का भी आरोप लगाया।
इसी दरम्यान एक नन ने इसकी जानकारी राउरकेला स्थित चर्च को दी। मामला लखनऊ तक पहुंच गया। लखनऊ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मामला संज्ञान में लेते हुए तुरंत चारों को छोड़े जाने को कहा। तब कहीं जाकर रात 11 बजे जीआरपी ने उन्हें छोड़ा। इसके बाद चारों को दूसरी ट्रेन से राउरकेला के लिए रवाना किया गया। वहीं, इस मामले में किशोरियों को धर्मांतरण के लिए ले जाए जाने का आरोप लगाते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से अजय शंकर तिवारी ने एफआईआर के लिए जीआरपी थाने में तहरीर दी थी। लेकिन, पुलिस ने जांच के बाद एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया था।
क्या था मामला
बीते सप्ताह शुक्रवार को उत्कल एक्सप्रेस के बी - 2 कोच में सवार होकर ईसाई धर्म की नन लीविया थोमस व हेमलता हज़रत निज़ामुद्दीन से राउरकेला जा रहीं थीं। उनके साथ दो किशोरी श्वेता व बीतरंग भी थीं। इसी ट्रेन के बी - 1 कोच में सवार होकर एबीवीपी के कार्यकर्ता झांसी आ रहे थे। इसी दरम्यान विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने आरपीएफ को सूचना दी की दो किशोरियों को धर्मांतरण के लिए ले जाया जा रहा है। इस पर सक्रिय हुई जीआरपी शाम तकरीबन साढ़े सात बजे चारों को उतारकर थाने ले आई थी।