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शासन से मिली मंजूरी, रेलवे में फंसा ग्वालियर मार्ग ओवरब्रिज, ‘ग्रीन सिग्नल’ का इंतजार

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झांसी। ग्वालियर मार्ग रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण के लिए रेलवे से तीन महीने पहले सहमति मांगी गई थी, जो अब तक नहीं मिल पाई है। जबकि, सेतु निगम की ओर से तैयारियां पूरी हैं। रेलवे की सहमति में मिलने में हो रही देरी की वजह से ब्रिज का निर्माण शुरू करने में भी विलंब हो रहा है।
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झांसी - कानपुर रेल लाइन पर सवारी व मालगाड़ियों की लगातार आवाजाही बनी रहती है, जिससे इस ट्रैक पर ग्वालियर मार्ग पर बनी रेलवे क्रॉसिंग 24 घंटे में से 12 घंटे से अधिक समय तक बंद रहती है। बार-बार क्रॉसिंग बंद होेने की वजह से लोगों को आवागमन में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। क्रॉसिंग खुलने पर वाहनों के आमने - सामने आ जाने पर जाम की स्थिति बन जाती है। अक्सर देखने में आता है कि एक ट्रेन गुजरने के बाद क्रॉसिंग पर खड़ी सभी गाड़ियां गुजर भी नहीं पाती हैं कि रेलवे फाटक दुबारा बंद हो जाता है। यातायात की इस बाधा को दूर करने के लिए यहां लंबे समय से ओवरब्रिज बनाए जाने की मांग की जा रही थी। जनप्रतिनिधियों द्वारा भी ये मुद्दा उठाया जा रहा था। शासन की पहल के बाद ब्रिज निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम को सौंपी गई। सेतु निगम ने भविष्य की संभावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए फोरलेन पुल की डिजाइन तैयार की। इसके निर्माण की लागत एक अरब बीस करोड़ इक्यावन लाख अस्सी हजार रुपये आंकी गई। इसमें रेलवे के अधिकार क्षेत्र में आने वाले रेलवे ट्रैक के ऊपर के हिस्से के निर्माण पर 22 करोड़ 81 लाख रुपये खर्च होंगे। सेतु निगम द्वारा दिसंबर माह में रेलवे से सहभागिता की सहमति मांगी थी, जो अब तक नहीं मिल पाई है, जिससे निर्माण शुरू होेने में विलंब हो रहा है।
विभागों ने दिया अपने खर्च का हिसाब
झांसी। ग्वालियर मार्ग ओवरब्रिज के निर्माण के लिए बिजली के खंभे, पाइपलाइन व बीएसएनएल की केबल को शिफ्ट करना पड़ेगा। इस पर होने वाले खर्च का सभी विभागों ने हिसाब सेतु निगम को दे दिया है। जल निगम ने साढ़े आठ करोड़, बिजली विभाग ने बाइस लाख, जल संस्थान ने इक्यावन लाख व बीएसएनएल ने इक्कीस लाख रुपये का स्टीमेट दिया है।
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ग्वालियर मार्ग पर ओवरब्रिज निर्माण के लिए रेलवे से सहभागिता का अप्रूवल दिसंबर में मांगा गया था, जो अब तक नहीं मिल पाया है। सहमति मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। - वेदप्रकाश, परियोजना निदेशक - सेतु निगम
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सहमति के लिए फाइल रेलवे के मुख्यालय भेजी गई है। परीक्षण के बाद रेल मुख्यालय इस पर फैसला लेगा। उम्मीद है कि जल्द अप्रूवल मिल जाएगा।
- मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी - रेलवे
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