झांसी। विद्युत विभाग की रिवैंप योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा। इसके लिए विभाग के खाते में 350 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त हुई है। पहले चरण में चिह्नित 200 मजरों के जर्जर तार व पोल बदले जाएंगे। खुले तार की जगह केबल लगने से आपूर्ति व्यवस्था बेहतर होने के आसार हैं।
ग्रामीण क्षेत्र की जर्जर विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने की लगातार चली आ रही मांग का दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम ने संज्ञान लिया है। खासकर बारिश के मौसम में आंधी और हवा के झोंके से टूटकर गिर रहे जर्जर तार व पोलों को बदलने का कार्य शुरू हो गया है। इसके लिए गत वित्तीय वर्ष में दक्षिणांचल वितरण निगम ने जिले से रिपोर्ट मांगी थी। इसमें पहले चरण में छोटे मजरों की आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया था। अधीक्षण अभियंता ने सभी अधिशासी अभियंताओं से सर्वे रिपोर्ट मांगी थी। सर्वे में जिले में करीब 200 मजरों को चिह्निंत किया गया है। जिसमें चिरगांव, बड़ागांव, पारीछा, बरुआसागर, रक्सा, बबीना, मोंठ, समथर, पूंछ, शाहजहांपुर और लोहागढ़ आदि ग्राम पंचायतों में जर्जर तार और खंभों को बदला जाएगा। साथ ही जिन क्षेत्रों में विद्युतीकरण नहीं हुआ है, वहां विद्युतीकरण का कार्य कराया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक कंपनी की ओर से खुले तारों को उतारकर मजरों में खंभों पर नई केबल लगाने का कार्य किया जाएगा। जिससे विद्युत चोरी की आशंका समाप्त हो जाएगी। आंधी के समय केबल गिरने से दुर्घटना की आशंका भी कम हो जाएगी।
गांवों में खुले तार की जगह केबल लगाने व जर्जर पोलों को बदलने के लिए 350 करोड़ रुपये विभाग को प्राप्त हुए हैं। जर्जर तार व पोल बदलने से ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार आएगा। - शैलेश कटियार, अधिशासी अभियंता ग्रामीण