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बेटे से वर्षों से नहीं है कोई वास्ता, पिता बोले-मिले सख्त से सख्त सजा

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झांसी। इंदौर में इकतरफा प्यार में पागल सात लोगों को जलाकर मारने की घटना का आरोपी युवक झांसी के खातीबाबा क्षेत्र का रहने वाला है। आरोपी के पिता का कहना है कि उनका बेटे से वर्षों से कोई वास्ता नहीं है। वो गलत संगत में पड़ गया था। उन्हें ये भी नहीं पता कि वो इंदौर में रह रहा था। पिता ने कहा कि बेटे को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।
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आरोपी युवक संजय दीक्षित झांसी के खातीबाबा इलाके की बृह्मपुरी कॉलोनी का रहने वाला है। संजय के पिता देवेंद्र कुमार दीक्षित रेलवे के एसी शेड में इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पिछले लगभग दस वर्षों से बेटे से बोलचाल बंद है। वह गलत संगत में पड़ गया था। नशा भी करने लगा था। कई बार उसे समझाया, लेकिन वो नहीं माना। ऐसे में आजिज आकर तीन साल पहले उसे परिवार से बेदखल कर दिया था। इसकी सूचना अखबार में भी प्रकाशित कराई थी। संजय कभी कभार ही घर आता था और घर में उसकी मां से ही बात होती थी। वे समझ रहे थे कि संजय दिल्ली में रहकर इंश्योरेंस सेक्टर में काम कर रहा है। उसके इंदौर में होने की जानकारी उन्हें घटना के बाद मिली। पिता ने कहा कि बेटे ने बहुत ही गलत काम किया है। इसकी उसे सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में वे बेटे की किसी भी तरह की मदद नहीं करेंगे।
उधर, इंदौर में हुई घटना की सूचना खातीबाबा की बृह्मपुरी कॉलोनी में शनिवार को ही आग की तरह फैल गई थी। लेकिन, इस बारे में कोई भी कुछ बोलने को तैयार नजर नहीं आया। रविवार को कॉलोनी में सन्नाटे की स्थिति रही। इक्का-दुक्का लोग आपस में घटना की चर्चा करते जरूर नजर आए।
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बीच में छोड़ी बीटेक की पढ़ाई
झांसी। संजय के पिता देवेंद्र कुमार दीक्षित ने बताया कि संजय की 12वीं तक की पढ़ाई झांसी में ही हुई। इसके बाद 2009 में बीटेक में उसका दाखिला भोपाल के एक कॉलेज में कराया था। बीटेक की दो साल की पढ़ाई उसकी ठीक चली। लेकिन, फाइनल ईयर में पहुुंचकर उसने पढ़ाई छोड़ दी। पढ़ाई छोड़ने के बाद वो वापस झांसी नहीं लौटा। कुछ समय भोपाल में रहा और इसके बाद दिल्ली चला गया था।
एक बार तो पिता ने ही बुलाई थी पुलिस
झांसी। पांच साल पहले संजय एक दिन नशे की हालत में घर में पहुंचा और हंगामा करने लगा। पिता के समझाने पर वो उनसे भी भिड़ गया। इस पर पिता ने ही पुलिस बुला ली थी। हालांकि, बाद में पिता ही बेटे को थाने से छुड़ा लाए थे।
मां का रो-रोकर है बुरा हाल
झांसी। घटना के बाद से आरोपी संजय की मां रेखा का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि उनके दो बेटे प्रियम और संजय हैं। प्रियम बड़ा है, जबकि संजय छोटा बेटा है। बचपन में सभी संजय की तारीफ करते थे और वो पढ़ाई में भी अच्छा था। घर में माहौल पूजा-पाठ का है। लेकिन, होश संभालने के बाद संजय में बड़ा बदलाव आया और वह अपनी मनमर्जी का मालिक हो गया। मां ने कहा कि उन्होंने कभी ऐसा सोचा भी नहीं था कि बेटा ऐसे भी दिन दिखाएगा।
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