झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में एनएसएस की ओर से संगोष्ठी हुई। इसमें कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने कहा कि बाल्यकाल से लेकर वृद्धावस्था तक उम्र के हर पड़ाव में गीता प्रासंगिक है। गीता जीवन का मर्म बताती है और कर्म पथ पर चलाना भी सिखाती है। गीता महज एक धार्मिक पुस्तक नहीं, बल्कि जीवन का संपूर्ण दर्शन है।
कुलपति ने कहा कि अर्जुन युद्ध से विरत हो चुके थे लेकिन गीता का उपदेश उन्हें न सिर्फ युद्ध करने के लिए तैयार करता है। साथ ही धैर्य बनाए रखने में सहायक भी होता है। गीता मनुष्य को उसके सही परिप्रेक्ष्य में रखती है। परिवार, समाज, क्षेत्र और धर्म के निकटवर्ती संदर्भों से हटाकर वह मनुष्य को उस विशाल ब्रह्मांड के संदर्भ में ले आती है, जिसका वह अभिन्न अंग है। कुलसचिव नारायण प्रसाद ने कहा कि गीता दुनिया का एकमात्र ऐसा काव्य है, जिस पर हजारों शोध पत्र प्रस्तुत किए गए हैं। गीता में लिखी हर पंक्ति पर शोध किया जा सकता है। डॉ. शंकर शरण तिवारी ने गीता को कई श्रेणियों में विभाजित कर बहुत सरल तरीके से उसके मर्म को विद्यार्थियों को समझाया। कहा कि गीता हमें आत्मनिर्भर बनना, कभी हार न मानना, सकारात्मक रहना सिखाती है। इस दौरान डॉ. मुन्ना तिवारी, डॉ. श्वेता पांडेय, डॉ. शिल्पा मिश्रा, डॉ. शुभांगी निगम, डॉ. भुवनेश्वर सिंह, डॉ. प्रशांत मिश्रा, डॉ. श्रीहरि त्रिपाठी, डॉ. अचला पांडेय, डॉ. नवीनचंद्र पटेल मौजूद रहे।
प्रश्नोत्तरी में वृंदा दुबे अव्वल
बीयू के पत्रकारिता संस्थान में गीता जयंती पर गीता पर विशेष प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता हुई। इसमें वृंदा दुबे प्रथम, आदेश राजपूत द्वितीय और अभय राठौर तृतीय स्थान पर रहे। इस दौरान डॉ. कौशल त्रिपाठी, राघवेंद्र दीक्षित, उमेश शुक्ला, अभिषेक कुमार, सतीश साहनी, वीरेंद्र कुमार मौजूद रहे।