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बिना बिके झांसी में एक्सपायर हो गईं पांच लाख की जेनरिक दवाएं

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झांसी। शासन की महत्वाकांक्षी जन औषधि योजना झांसी में धड़ाम हो गई है। डॉक्टरों द्वारा जन औषधि दवाएं नहीं लिखने की वजह से इस साल पांच लाख रुपये तक की दवाएं एक्सपायर हो चुकी हैं। इससे केंद्र संचालकों को बड़ा झटका लगा है। जबकि, ब्रांडेड दवाओं का कारोबार खूब फल-फूल रहा है।
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आम आदमी को सस्ता इलाज उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने भारतीय जन औषधि परियोजना शुरू की थी। वर्ष 2015 से जन औषधि केंद्र खुलने की शुरूआत हुई और फिर जिले में 13 लोगों ने लाइसेंस लेकर दुकानें खोल लीं। शुरूआत में हर महीने एक करोड़ रुपये की जेनरिक दवाएं भी बिकने लगीं। लेकिन, डॉक्टरों ने जेनरिक के बजाए ब्रांडेड दवाएं लिखना जारी रखा। धीरे-धीरे मेडिकल कॉलेज के नजदीक, वीरांगना नगर, सीपरी बाजार समेत चार जन औषधि केंद्र बंद हो गए हैं। अब जो केंद्र खुले भी हैं, उनमें से कुछ और बंद होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। जबकि, झांसी में करीब 70-80 दवा कंपनियों के स्टॉपेज हैं। यह सभी बड़ी कंपनियां हैं, जो बड़ी मात्रा में बीमारियों की दवाएं बेच रही हैं। ये कंपनियां कर्मचारियों द्वारा डॉक्टरों, मेडिकल स्टोरों से सेटिंग कर महंगी दवाएं बिकवा रही हैं। इस वजह से जिले के बाशिंदे एक महीने में 15.50 करोड़ से अधिक की दवा खा रहे हैं। जबकि, इस साल केंद्रों पर पांच लाख रुपये तक की जेनरिक दवाएं एक्सपायरी हो गई हैं।
60 फीसदी तक घट गई बिक्री
पिछले छह सालों में जेनरिक दवाओं की बिक्री लगातार घटती चली गई। अब हाल ये है कि जन औषधि दवाओं की सेल 60 फीसदी तक घट गई है। केंद्र संचालकों के मुताबिक महीने में चालीस लाख रुपये तक की बिक्री बमुश्किल हो पा रही है।
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मुहर लगते ही कई गुना बढ़ जाती कीमतें
मर्ज के हिसाब से दवाइयों का सॉल्ट तैयार किया जाता है। जेनरिक दवाइयों में इस्तेमाल में लाया जाने वाला सॉल्ट लगभग एक जैसा होता है। इसके बाद कंपनियों द्वारा उस सॉल्ट को खरीदकर थोड़ी तब्दीली के बाद अपनी मुहर लगा दी जाती है। फिर सॉल्ट की कीमत में काफी बढ़ोतीर हो जाती है। इसके बाद एक्साइज ड्यूटी आदि लगने के बाद वह दवा कई गुना महंगी बिकती है।
एक लाख रुपये की दवाएं तो मेरे केंद्र पर ही इस साल एक्सपायरी हो चुकी हैं। इसके अलाव अन्य आठ केंद्रों पर भी कम से कम 50-50 हजार तक की दवाएं कालातीत हो गई हैं। कुल मिलाकर साल भर में जिले में पांच लाख तक की जेनरिक दवाएं एक्सपायरी हुई हैं। यह सिर्फ डॉक्टरों द्वारा ब्रांडेड दवाएं लिखने के कारण हुआ है। - दिवाकर त्रिपाठी, संचालक, जन औषधि केंद्र।
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