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धमाके के साथ फटे चार सिलिंडर, आसपास के मकानों की खिड़कियों के कांच टूटे

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झांसी। जिस तीन मंजिला इमारत में आग लगी थी उसमें सबसे ऊपर के हिस्से में बने मकान में एक एक करके धमाके के साथ चार सिलिंडर फट गए। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के कई मकानों के खिड़कियों के कांच भी टूट गए। दीवारों का प्लास्टर गिर गया था। मकान की छत भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस अग्निकांड से होने वाले नुकसान को करोड़ों में माना जा रहा है।
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कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था। पहले तल में साड़ी का शोरूम था लिहाजा यहां से आग ऐसी भड़की कि तीसरी मंजिल तक लपटें दिखाई दे रही थीं। तीसरी मंजिल पर बने मकान की रसोई में तीन सिलेंडर रखे हुए थे। आग पहुंचते ही धमाके के साथ फट गए। जिस इमारत में आग लगी थी वहां आसपास भी कपड़ों के कई बड़े गोदाम और शोरूम हैं। अगर आग फैल जाती तो भारी नुकसान हो सकता था। जब आग की जानकारी कारोबारियों को हुई तो वह भी अपनी दुकानों पर पहुंच गए थे।
कोई हमें बचा लो, धुएं से दम घुट रहा है....आग में फंसे श्रीराम लगा रहे थे गुहार
झांसी। साड़ी के शोरूम में लगी आग कुछ ही देर में तीसरी मंजिल पर बने मकान तक पहुंच गई थी। उस वक्त कुछ लोग सो रहे थे जबकि कुछ जाग गए थे। कुछ ही देर में मकान में धुआं ही धुआं हो गया था। हालत यह थी कि सांस भी नहीं ले पा रहे थे। बुजुर्ग श्रीराम मकान की खिड़की से काफी देर तक बचाने की गुहार लगाते रहे। आसपास के लोगों ने बताया कि वह काफी कोशिश कर रहे थे कि उन्हें बचा लिया जाए लेकिन कोई रास्ता ही नहीं था। हर तरफ आग ही आग थी। श्रीराम काफी देर तक गुहार लगाते रहे लेकिन बचाव का कोई रास्ता ही नहीं दिख रहा था।
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श्रीराम के परिवार को बचाने के लिए जुबैर, जुनैद और रऊफ ने लगाई जान की बाजी
झांसी। आग की लपटों में घिरे परिवार को बचाने के लिए पड़ोसी जुबैर, जुनैद और रऊफ ने जान की बाजी लगा दी थी। यह लोग अपनी परवाह किए बगैर बचाव कार्य में लगे रहे। इनकी कोशिश थी कि तीसरी फ्लोर पर जो लोग फंसे हुए हैं उन्हें किसी तरह से निकाला जाए। इन लोगों ने पहले सीढ़ी की व्यवस्था की। सीढ़ी लगाकर मकान के ऊपर चढ़ गए। जो लोग फंसे हुए थे उन्हें किसी तरह से बाहर निकाला। प्रदीप सोनी भी आसपास के लोगों को साथ लेकर मदद में लगे रहे। जब उस वक्त कुछ हाथ नहीं लगा तो साड़ियों को ही रस्से के रूप में प्रयोग किया गया। साड़ियों के सहारे ही लोग नीचे उतारे गए। जुबैर और जुनैद ने बताया कि सबसे पहले आग की जानकारी उन्हें हुई थी। क्योंकि सब पड़ोसी हैं लिहाजा जानते थे कि श्रीराम का परिवार ऊपरी मंजिल पर रहता है लिहाजा उन्होंने सबसे पहले उन्हें ही बचाने की कोशिश शुरू की। मकान के जिस हिस्से की तरफ आग ज्यादा नहीं थी वहां से सीढ़ी लगाई गई। इन लोगों का कहना था कि वह श्रीराम और उनकी पत्नी शांति बेहोश होकर गिर गईं थीं। धुएं में उनका दम घुट गया और फिर आग ने चपेट में ले लिया था। लोगों ने बताया कि जब तक पुलिस और फायर ब्रिगेड पहुंचती तब तक पड़ोसी ही मदद करते रहे थे।ल
बचाव के दौरान कोतवाल समेत चार पुलिसकर्मी झुलसे
सुबह हवा चलने की वजह से आग ऊपरी मंजिल पर तेजी से फैल गई थी। आग का झोंका खिड़की के रास्ते बाहर आ रहा था। आसमान मेें काला धुआं भर गया था। आग लगने से पैदा हुए अत्याधिक ताप से इमारत के एक हिस्से के धसकने का भी खतरा पैदा हो गया। आग लगने के बाद पूरे इलाके की लाइट काट दी गई थी। इन खतरनाक परिस्थिति में फायर कर्मियों ने भीतर पहुंचकर मेन ड्रेन से पानी छोड़ना शुरू किया। करीब पैंतालीस मिनट तक सिर्फ मेन ड्रेन से ही पानी छोड़ना पड़ा। आग बुझाने के दौरान कोतवाल तुलसीराम पांडेय, फायर मैन हर नारायण सिंह, निखिल यादव, लीडिंग फायरमैन विनोद मिश्रा, हरिप्रसाद मामूली रूप से झुलस गए। इनको उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।
करीब पचास साल पहले फुटपाथ पर लगाते थे कपड़े की दुकान
पहले इसी इमारत में किराए पर रहते थे
कपड़ा व्यवसायी श्रीराम अग्रवाल करीब पचास साल पहले इसी बाजार में फुटपाथ पर कपड़े की दुकान लगाते थे। उनके जानने वालों का कहना है कई वर्ष तक वह यहां दुकान लगाते रहे। मेहनत की बदौलत उनकी जल्द पहचान बन गई। इसके बाद उन्होंने यहां एक किराए पर दुकान ले लिया। यहां उन्होंने कई साल तक कारोबार किया। उसके बाद उस दुकान को उन्होंने मकान मालिक से खरीद लिया। जहां आग लगी यही वह दुकान थी। परिचितों का कहना है अग्रवाल परिवार इसके पहले शहर के कुम्हार वाली गली में रहता था। यहां उनकी सिर्फ दुकान चलती थी। कुछ वर्ष पहले ही उन्होंने दुकान को आधुनिक रूप से बनवाने के साथ ही ऊपरी मंजिल में रिहायशी घर बनवाया था। करीब दो-तीन साल पहले ही पूरा परिवार यहां रहने आया।
बहुमंजिली इमारतोें का इकलौता दरवाजा बना जानलेवा
बहुमंजिली इमारतों में निकलने का एकमात्र रास्ता अग्रवाल परिवार के लिए भी जानलेवा साबित हुआ। सीढ़ियों मेें आग फैली होने से परिवार बाहर ही नहीं निकला सका और भीतर ही फंसा रहा। भवन उपविधि के मुताबिक बहुमंजिली इमारत में न सिर्फ निकलने के अलग दो रास्ते होने चाहिए बल्कि उनको चारों ओर रियर सेट बैक एवं साडड सेट बैक भी छोड़ना चाहिए। जिस इलाके में यह इमारत बनी हुई थी, वहां न रियर सेट बैक था और न ही साडड सेट बैक छोड़ा गया था। इस इमारत में निकलने का भी सिर्फ एक ही रास्ता था। आम तौर पर अधिकांश व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में सीढ़ियों पर माल भरा रहता है। इनमें निकलते तक का रास्ता नहीं होता है। यहां भी पूरी सीढ़ियों में कपड़ों से भरे डिब्बे भरे हुए थे। सीढ़ियों पर आग लगने के बाद नीचे उतरने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था। इस वजह से श्रीराम एवं शांति देवी एवं दोनों ही बुजुर्ग होने के साथ ही उनका वजन भी ज्यादा था। इस वजह से वह समय पर नहीं उतार जो सके। इस वजह से उनकी मौत हो गई।
आग की दहशत में तीसरी मंजिल से छलांग लगाने वाली थी महिलाएं
आग लगने के बाद से अग्रवाल परिवार के सदस्य दहशत में हैं। बचाव कार्य में लगे सदस्यों का कहना है जैसे ही सीढ़ी के रास्ते आग ऊपर की ओर फैली यह देखकर संजय की पत्नी सुधी घबरा कर नीचे छलांग लगाने की कोशिश करने लगी। उसे परिजनों ने किसी तरह पकड़ा। कुछ देर बाद उसे नीचे उतारा गया। नीचे आने के बाद भी संभल नहीं हो पा रही थीं। अजय एवं संजय के बच्चों का भी यही हाल था। राहत कार्य के दौरान सबसे पहले बच्चों को नीचे उतारा गया। उसके बाद अजय एवं संजय की पत्नी को नीचे उतारा गया। अजय को कपड़ा पहनने तक का मौका नहीं मिला था। उधर, आग से बचकर निकलने के बाद भी बच्चों का हाल बुरा था। दादा-दादी की मौत की सूचना मिलने पर बच्चे बिलख-बिलख कर रोने लगे। हादसे की सूचना मिलने पर अग्रवाल परिवार के शहर में रहने वाले परिजन भी यहां पहुंच गए थे। इन सभी को यह लोग अपने साथ लेकर गए।
डटा रहा एसएसपी समेत प्रशासनिक अमला
अग्निकांड की सूचना मिलते ही प्रशासनिक एवं पुलिस अमला मौके पर पहुंच गया। एसएसपी शिवहरी मीना, सीडीओ शैलेष कुमार, एडीएम वित्त रामअक्षयवर चौहान, एसपी सिटी विवेक त्रिपाठी, सीओ सिटी राजेश राय समेत कोतवाली, प्रेमनगर, सीपरी बाजार समेत अन्य थानों से पुलिस बल एवं दमकलकर्मी एवं नागरिक सुरक्षा कोर के सदस्य पूरे राहत कार्य के समय तक वहां मौजूद रहे।
वाराणसी ले जाया गया दपंती का शव
अग्निकांड में मारे गए बुजुर्ग दपंती का शव पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस ने परिजनों के हवाले कर दिया। डॉक्टरों के पैनल ने दोनोें के शव का पोस्टमार्टम किया। इसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। शव बुरी तरह से झुलसा हुआ था। पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजन शव लेकर बनारस अंतिम संस्कार कराने चले गए।
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