झांसी। जिले के सरकारी बैंक इन दिनों उन सवा तीन लाख खाताधारकों को ढूंढने में जुटे हैं जो 10 साल पहले बैंक में अपना खाता खुलवाकर भूल गए। असल में इन खातों में तकरीबन 37 करोड़ रुपया डंप पड़ा है। बैंक उनके पते पर बार-बार नोटिस भेज रहा, लेकिन इन दावेदारों का कोई अता-पता नहीं चल रहा। फिलहाल बैंकों ने इन खातों को गैर संचालित घोषित कर रुपया आरबीआई के डीप में स्थानांतरित कर दिया है।
जिले के विभिन्न बैंकाें में सवा तीन लाख खातों में 37 करोड़ रुपये की रकम जमा है। दस साल का समय बीत जाने के बाद भी इन रुपयों का कोई भी दावेदार नहीं आ रहा है। बैंकों द्वारा कई बार खाताधारकों को पत्र लिखकर सूचित भी किया गया। इसके अलावा खाता संचालित रखने के लिए नोटिस भी भेजे गए, लेकिन दस साल बाद भी इन खातों के दावेदार बैंक नहीं पहुंचे। मजबूरन बैंक द्वारा इन खातों को इनऑपरेटिव (गैर संचालित) घोषित कर आरबीआई की योजना के तहत डिपॉजिट एजूकेशनल एंड अवेयरनेस अकाउंट (डीफ) में स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके साथ ही बैंक इन खाताधारकों को ढूंढने में लगा है।
वर्तमान में जिले भर में विभिन्न सरकारी बैंकों की 227 शाखाओं में लगभग 22 लाख खाते संचालित हो रहे हैं। ये तकरीबन सवा तीन लाख खाते इन्हीं में से हैं। इनमें दस सालों से किसी भी तरह की लेनदेन की प्रक्रिया अमल में नहीं लाई गई है। ऐसे खातों को बैंक द्वारा इनऑपरेटिव खाते घोषित कर दिए गए। इनऑपरेटिव खातों की सबसे अधिक संख्या छह हजार से अधिक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की है। बैंकों का कहना है कि जो खाताधारक अपना पैसा वापस चाहते हैं वो संबंधित बैंक से संपर्क कर सकते हैं।
दावेदारों को मिल सकता है डीफ में जमा रुपया
झांसी। दस साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी खाते में जमा रकम दावेदारों को वापस मिल सकती है। इसके लिए खाताधारक या संबंधित व्यक्ति को बैंक में जाकर आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। प्रक्रिया पूरी होने पर बैंक द्वारा आरबीआई से रकम मंगा कर दावेदार को सौंपी जाती है। वहीं खाताधारक की मौत होने की स्थिति में जमा रकम को उत्तराधिकारी को सौंपे जाने का नियम है लेकिन कागजी प्रक्रिया व बैंक द्वारा संस्तुति होने पर ही उत्तराधिकारी को जमा रकम दी जाती है।
दस साल बीत जाने के बाद भी खातों का कोई भी दावेदार नहीं आने पर आरबीआई के डीफ में रुपयों को स्थानांतरित कर दिया गया है। इनऑपरेटिव सवा तीन लाख खातों में तकरीबन 37 करोड़ रुपयों की धनराशि जमा है। दस साल बीत जाने के बाद दावेदार आने की स्थिति में कागजी प्रक्रिया व संबंधित प्रमाणपत्र देने पर आरबीआई से रुपयों को वापस मंगा कर दावेदारों को सौंप दिया जाता है।
अरुण कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक