झांसी। खेती के लिए नई तकनीक अपनाने और किसानों को जागरूक करने के लिए पलींदा गांव में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। किसानों को बताया गया कि सीधी बुवाई से पानी की बचत होने के साथ ही खेतों की उर्वरता भी बनी रहती है। साथ ही रबी के फसल की पैदावार भी 15 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
कृषि विश्वविद्यालय बुंदेलखंड के किसानों को मिट्टी और पानी के संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया। गोष्ठी में वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि धान की फसल में किसान बहुत ज्यादा पानी के उपयोग के साथ नर्सरी लगाने और रोपाई करने में अपना समय, मजदूर और पैसा अत्यधिक खर्च करते हैं। इस स्थिति से उबरने के लिए उन्होंने किसानों को बिना मचान किए धान के एरोबिक
किस्मों की सीधी बुवाई करने को कहा। उन्होंने किसानों को बताया कि धान के रोपाई के लिए पानी की अत्यधिक आवश्यकता होती है। पानी की कमी से खेत में दरार पड़ती है और मिट्टी की भौतिक दशा खराब हो जाती है। मिट्टी में दरार पड़ने से रबी की फसल की तैयारी में खेतों की कई बार जुताई करनी पड़ती है और उपज भी कम हो जाती है। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस तकनीक को अपनाकर बुंदेलखंड के किसान मिट्टी और पानी का संरक्षण भी कर सकते हैं। गोष्ठी में डॉ. एमके सिंह, डॉ. गुंजन गुलेरिया, डॉ. निशांत भानु उपस्थित रहे।