झांसी। रेलवे से टेंडर प्रक्रिया की विदाई हो गई है। अब रेलवे टेंडर के बजाए बोली प्रक्रिया का इस्तेमाल करेगा। बोली लगाने के माध्यम से रेलवे अपने ठेकों का निपटारा करेगा। रेल अफसर इससे करीब सालाना करीब 20-25 प्रतिशत तक राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद जता रहे हैं।
झांसी मंडल के अंतर्गत झांसी, ग्वालियर, डबरा, अंतारी, कोटरा, चित्रकूट धाम, हरपालपुर, खजुराहो, ईशानगर, कालपी, निवाड़ी, ओरछा, टीकमगढ़, दतिया, सोनागिरी, मानिकगढ़, बांदा, भिंड, महोबा, ललितपुर समेत कुल 189 स्टेशन हैं। यहां रेलवे स्टेशन के बाहर पार्किंग, स्टेशन के भीतर प्रचार, ट्रेन में पब्लिसिटी, पे एंड यूज शौचालय समेत अन्य कार्य के लिए टेंडर होते रहे हैं लेकिन, कई बार निविदा प्रक्रिया के चलते रेलवे को उसकी उम्मीद के मुताबिक राजस्व नहीं मिल पाता। कई बार रेलवे ठेके पूल भी हो जाते थे। यह सब शिकायतें रेलवे बोर्ड पहुंचीं।
इसके बाद बोर्ड ने निविदा की जगह बोली प्रक्रिया अपनाने पर के निर्देश दिए। अब चालू वित्तीय वर्ष से यह प्रक्रिया लागू की जा रही है। रेल अफसरों के मुताबिकनिविदा प्रकाशित होने के बाद बोली दाताओं को बारह दिन का समय मिलेगा। इसके बाद निश्चित समय पर सभी बोली दाताओं को आना होगा। उनको मौके पर बोली लगानी होगी।
राजस्व बढ़ाने के लिए इस प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। अब जिन भी सेवाओं का समय खत्म होगा, उसके लिए टेंडर न कराकर सीधी बोली लगाई जाएगी। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है।
-नवीन दीक्षित, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक