रेलवे बोर्ड कर्मचारी की मृत्यु के उपरांत पति या पत्नी को आजीवन फैमिली पेंशन देता है। पत्नी के अलावा अगर कोई विधवा पुत्री या दिव्यांग बेटा- बेटी कर्मचारी पर आश्रित हैं तो उनको भी पति या पत्नी की मृत्यु के उपरांत फैमिली पेंशन देने का प्रावधान है। दिव्यांगों को फैमिली पेंशन पाने के लिए 45 फीसदी या इससे ज्यादा की दिव्यांगता होनी चाहिए। रेलवे चिकित्सक दिव्यांगता तय करते हैं। मगर मंडल में दिव्यांगता पेंशन पाने के पात्रों को लंबे समय से यह लाभ नहीं मिल पा रहा था।
रेलवे चिकित्सक यह कहकर कार्मिक विभाग पर मामला डाल देते थे कि पहले वह तय करें कि पात्र व्यक्ति के पास आय का कोई स्रोत तो नहीं है या खुद कमाने में सक्षम हैं कि नहीं। जबकि कार्मिक विभाग रेलवे अस्पताल प्रशासन पर जिम्मेदारी डाल देता था। नॉर्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन इस समस्या के हल के लिए लगातार उच्च अधिकारियों के समक्ष मुद्दा उठाती आ रही है। विगत नौ और दस सितंबर को प्रयागराज मुख्यालय में जीएम के साथ हुई पीएनएम बैठक में यूनियन के पदाधिकारियों ने इस मुद्दे को रखा।
बैठक में तय हुआ कि रेलवे चिकित्सक की रिपोर्ट के आधार पर ही दिव्यांग पात्रों को फैमिली पेंशन दी जाएगी। इस तरह के 56 मामले लंबित चल रहे हैं, जिनका अब जल्द ही निस्तारण हो सकेगा। बैठक में केंद्रीय सहायक महामंत्री अजय सिंह यादव, बीएस कंसाना, मंडल अध्यक्ष एचएस चौहान मौजूद रहे।
एसी लोको शेड कर्मियों को मिलेगा वर्दी भत्ता
पीएनएम बैठक में कानपुर शेड की तरह झांसी टीआरएस (एसीलोको) कर्मियों को सालाना वर्दी भत्ता (यूनीफार्म एलाउंस) देने का मुद्दा उठाया गया। इस पर टीआरएस कर्मियों को सालाना पांच हजार रुपये वर्दी भत्ता देने पर सहमति बनी।