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किसानां के लिए अलग से बिजली फीडर लटका

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झांसी। बिजली विभाग ने किसानों को सिंचाई की सुविधा को दिन में दस घंटे बिजली देने के लिए अलग से बिजली फीडर बनाने का निर्णय लिया था। इसका काम फरवरी में शुरू होना था, लेकिन कोरोना के कारण काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है।
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अभी सिंचाई करने के लिए किसानाें को अलग फीडर की व्यवस्था नहीं है। इस कारण सिंचाई के सीजन में ट्रांसफार्मर ओवरलोड हो जाते हैं और फुंक जाते हैं। ओवरलोडिंग की वजह से दिन में सिंचाई नहीं हो पाती है और मजबूरी में किसानों को रात में सिंचाई करनी पड़ती है। ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित बनाने के लिए बार- बार बिजली ट्रिप की जाती है। इससे भी किसानों को नुकसान होता है। बिजली विभाग ने औद्योगिक क्षेत्र की तरह सिंचाई के लिए अलग से 25 फीडर बनाने का निर्णय लिया। इसके अंतर्गत एक फीडर से कम से कम दो हजार ट्यूबवेल के कनेक्शन जोड़े जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 35 विद्युत सब स्टेशन हैं, जिनसे 1.64 लाख उपभोक्ता जुड़े हैं। इसमें से साढ़े सात हजार से अधिक किसानों ने सिंचाई के लिए ट्यूबवेल कनेक्शन ले रखे हैं।
समस्या के समाधान के लिए जनपद के अलग- अलग स्थानों पर 25 नए फीडर बनाए जाने हैं। यह फीडर बड़ागांव, बरुआसागर, बबीना, मऊरानीपुर, एरच, गुरसराय, सकरार, टहरौली, गरौठा, पूंछ, मोंठ, बामौर, टोड़ी फतेहपुर, रक्सा, चिरगांव क्षेत्र में बनाए जाने हैं। काम फरवरी में शुरू होना था, लेकिन कोरोना का संक्रमण फैलने के कारण काम शुरू नहीं हो सका। इसके बाद मजदूरी बढ़ गई। तब से लेकर अब तक काम शुरू नहीं हो सका है।
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वर्जन
सिंचाई के दौरान जहां ओवरलोडिंग की स्थिति है। उन स्थानों पर फीडर बनाए जाने हैं, लेकिन टेंडर की शर्तों के कारण काम अटका हुआ हैै। इसका जल्द समाधान हो जाएगा। इसे बनाने के लिए 18 महीने का समय निर्धारित किया गया है।
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- जेपीएन सिंह, अधीक्षण अभियंता (ग्रामीण)।
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