झांसी। कोयला संकट के बीच शुक्रवार का दिन बिजली के लिहाज से अच्छा रहा। दरअसल, प्रदेश में दशहरा पर कल कारखाने और सरकारी दफ्तर बंद होने से बिजली की मांग 20 हजार मेगावाट से घटकर 17 हजार मेगावाट पर पहुंच गई। परिणामस्वरूप स्टेट लोड डिस्ट्रीब्यूशन कंट्रोल के आदेश पर पारीछा थर्मल पावर प्लांट में दिन के वक्त 710 मेगावाट की जगह 400 मेगावाट बिजली का ही उत्पादन किया गया। हालांकि, रात में दोबारा मांग बढ़ने पर इकाइयों को पूर्ण क्षमता के साथ चलाया गया। वहीं, शुक्रवार को प्लांट को दो मालगाड़ी कोयला और मिल गया। इससे स्टॉक में दस हजार टन कोयला हो गया है। इधर, ललितपुर स्थित बजाज संयंत्र में 660 मेगावाट की तीन इकाइयों में दो से उत्पादन किया जा रहा है।
झांसी (पारीछा) के थर्मल पावर प्लांट और ललितपुर में स्थित बजाज पावर प्लांट में रोजाना 2900 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। लेकिन, कोयले की कमी की वजह से पिछले दो हफ्ते से उत्पादन में गिरावट चल रही है। वर्तमान में पारीछा की चार इकाइयों में तीन से 710 मेगावाट उत्पादन हो रहा है। कोयले की कमी से 210 मेगावाट की एक इकाई बंद चल रही है। चारों इकाइयों को एक साथ चलाने के लिए तीन से चार मालगाड़ी (रैक) कोयले की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन इन दिनों एक या दो मालगाड़ी कोयला ही प्रतिदिन मिल पा रहा है। शुक्रवार को दो रैक मिलने से स्थिति नहीं बिगड़ सकी। दूसरा, प्रदेश में बिजली की मांग रहने से तीनों इकाइयों को केवल 400 मेगावाट की क्षमता से चलाया गया। स्टॉक में दस हजार टन कोयला है, जिससे दो से तीन दिन का काम चलाया जा सकता है।
इसी तरह ललितपुर प्लांट की 660- 660 मेगावाट की तीन इकाइयों से दो से उत्पादन हो रहा है। एक इकाई मंगलवार को तकनीकी खराबी से बंद हो गई थी, जिसकी मरम्मत की जा रही है। सूत्रों की माने तो शुक्रवार को बजाज पावर प्लांट को एक भी रैक कोयला नहीं मिल सका। स्टॉक में जो कोयला है उससे दो इकाइयों को ही चलाया जा सकता है।
- शुक्रवार को दो मालगाड़ी कोयला मिलने से स्टॉक में दस हजार टन कोयला हो गया है। दशहरा पर बिजली की मांग कम रहने से स्टेट लोड डिस्ट्रीब्यूशन कंट्रोल के आदेश पर इकाइयों को 710 मेगावाट की जगह 400 मेगावाट की क्षमता से चलाया गया।
एमके सचान, मुख्य महाप्रबंधक (पारीछा थर्मल पावर प्लांट)।
- इसलिए कम क्षमता पर चलाईं जातीं हैं इकाइयां
बिजली की खपत के हिसाब से उपलब्धता अधिक होने पर फ्रीक्ंिवेंसी बढ़ जाती हैं। इससे मशीनें ट्रिप हो जाती हैं। सिस्टम को बचाने के लिए ऐसा करना पड़ता है। बिजली खपत के हिसाब से उपलब्धता कम होने पर वोल्टेज की समस्या उत्पन्न हो जाती है। बिजली को स्टोर नहीं किया जा सकता। इस कारण उतना ही उत्पादन किया जाता है, जितनी जरूरत होती है।
- साढ़े चार रुपये प्रति यूनिट बिक रही बिजली
उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन की उत्पादन इकाइयां जो बिजली बनातीं हैं उसे ग्रिड में डाल दिया जाता है। ग्रिड की मदद से प्रदेश के अंदर व बाहर उसका वितरण होता है। नियामक आयोग बिजली और कोयला की उपलब्धता के आधार पर ही दरों का निर्धारण करता है। उन्हीं दरों पर सरकार बिजली खरीदती है। बिजली की दरें साल भर घटती- बढ़ती रहती हैं। वर्तमान में साढ़े चार रुपये प्रति यूनिट बिजली बेची जा रही है।
- दो इकाइयां हो चुकी हैं बंद
वर्तमान में पारीछा थर्मल पावर प्लांट में 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो इकाइयां संचालित हैं। चारों इकाइयों को प्रतिदिन पूर्ण क्षमता से चलाने के लिए तीन से चार रैक कोयले की आवश्यकता पड़ती है। पुरानी 110 मेगावाट की दो इकाइयां को बंद कर दिया गया है। प्लांट प्रशासन के लिए बंद इकाइयों का मेंटेनेंस कराना बहुत महंगा पड़ रहा था। ललितपुर स्थित बजाज पावर प्लांट में 660- 660 मेगावाट की तीन इकाइयां स्थापित हैं।