झांसी। त्योहारी सीजन में जहां एक ओर बिजली की मांग बेतहाशा रूप से बढ़ गई है, तो वहीं चार-पांच दिनों के भीतर कोयले की कमी की वजह से उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पारीछा और ललितपुर के बजाज पावर प्लांट में रोजाना 2900 की जगह सिर्फ 1130 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। हालात में जल्द सुधार न हुआ तो आने वाले दिनों में घरों का भी करंट गुल हो सकता है।
देश में बिजली का 70 फीसदी उत्पादन कोयले के द्वारा ही होता है। लेकिन, पिछले कुछ दिनों से थर्मल पावर संयंत्रों को पर्याप्त कोयला मिल नहीं पा रहा है, जिससे बिजली उत्पादन में भारी गिरावट आई है। झांसी में पारीछा स्थित थर्मल पावर प्लांट की चार में से दो इकाइयां पिछले तीन दिनों से बंद चल रही हैं। यहां 920 की जगह सिर्फ 460 मेगावाट बिजली का ही उत्पादन हो पा रहा है। वहीं, ललितपुर के बजाज पावर प्लांट में भी मंगलवार को 660 मेगावाट की एक इकाई को कोयला न होने की वजह से बंद करना पड़ गया था। ललितपुर प्लांट में 1980 की जगह 1320 मेगावाट बिजली का ही उत्पादन हो पा रहा है। दोनों ही प्लांटों में कोयले का बमुश्किल दो दिन का ही स्टॉक बचा है। कमोबेश यही स्थिति देश के अन्य पावर प्लांटों की भी बनी हुई है।
जबकि, नवरात्र की शुरुआत से ही बिजली की मांग में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हो जाती है। जगह-जगह सजने वाले दुर्गा उत्सव पंडालों में बिजली की भारी खपत होती है। लेकिन, कोयले की आपूर्ति जल्द सुचारु न होने पर आने वाले दिनों में सरकार बिजली कटौती के लिए मजबूर हो सकती है।
संकट के ये हैं प्रमुख कारण
- भारी बारिश से खदानों में पानी भर गया है, जिससे कोयले की निर्बाध रूप से निकासी नहीं हो पा रही है।
- कोरोना काल में घर में बैठे लोगों ने बिजली का भरपूर इस्तेमाल किया, जिससे इसकी खपत बढ़ी रही।
- सरकार के हर घर बिजली देने की योजना से बिजली की खपत में भारी बढ़ोत्तरी हुई है।
- ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2019 में अगस्त सितंबर माह में 10 हजार 660 करोड़ यूनिट प्रति महीना बिजली की खपत थी, जो 2021 में बढ़कर 12 हजार 420 करोड़ यूनिट प्रतिमाह तक पहुंच गई है।
झांसी में 170 मेगावाट तक की खपत
झांसी। झांसी जनपद में प्रतिदिन 150 से 170 मेगावाट बिजली की खपत होती है। त्योहारी सीजन में ये मांग और भी अधिक बढ़ जाती है। मांग के अनुसार उपलब्धता न होने की वजह से अक्सर दीपावली व अन्य त्योहारों में बिजली विभाग को कटौती करनी पड़ जाती है। जबकि, इस बार तो हाल और भी बेहाल है।