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डॉक्टर नहीं लिख रहे जेनरिक दवाएं, एक तिहाई जन औषधि केंद्रों ने सरेंडर किए लाइसेंस

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झांसी। मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई जन औषधि योजना जिले में धड़ाम हो गई है। पिछले छह सालों में जेनरिक दवाओं की बिक्री 50 फीसदी तक घट गई है। एक तिहाई केंद्रों के संचालकों ने अपने लाइसेंस सरेंडर कर दिए हैं। इसकी मुख्य वजह डॉक्टरों द्वारा जेनरिक दवाएं नहीं लिखना है। कई डॉक्टर तो मरीजों को खरीदी गईं दवाएं तक जन औषधि केंद्रों पर लौटाने के लिए भेज रहे हैं।
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आम आदमी को सस्ता इलाज उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने भारतीय जन औषधि परियोजना शुरू की थी। वर्ष 2015 से जन औषधि केंद्र खुलने की शुरूआत हुई और फिर जिले में 13 लोगों ने लाइसेंस लेकर दुकानें खोल लीं। शुरूआत में हर महीने एक करोड़ रुपये की जेनरिक दवाएं भी बिकने लगीं। लेकिन, डॉक्टरों ने जेनरिक के बजाए ब्रांडेड दवाएं लिखना जारी रखा। इससे जन औषधि केंद्रों का खर्चा तक नहीं निकल सका।
धीरे-धीरे करके वीरांगना नगर, मेडिकल कॉलेज के पास, सीपरी बाजार समेत चार जन औषधि केंद्र बंद हो गए हैं। अब जो केंद्र खुले भी हैं, उनमें से कुछ और बंद होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। अब हाल ये है कि हर महीने 50 लाख की भी बिक्री नहीं हो पा रही है जबकि, झांसी में करीब 70-80 दवा कंपनियों के स्टॉपेज हैं। यह सभी बड़ी कंपनियां हैं, जो बड़ी मात्रा में विभिन्न मर्जों की दवाएं बेच रही हैं। ये कंपनियां कर्मचारियों द्वारा डॉक्टरों, मेडिकल स्टोरों से सेटिंग कर महंगी दवाएं बिकवा रही हैं। इस वजह से जिले के बाशिंदे एक महीने में 15.50 करोड़ से अधिक की दवा खा रहे हैं।
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मुहर लगते ही कई गुना बढ़ जाती कीमत
मर्ज के हिसाब से दवाइयों का सॉल्ट तैयार किया जाता है। जेनरिक दवाइयों में इस्तेमाल में लाया जाने वाला सॉल्ट लगभग एक जैसा होता है। इसके बाद कंपनियों द्वारा उस सॉल्ट को खरीदकर थोड़ी तब्दीली के बाद अपनी मुहर लगा दी जाती है। फिर सॉल्ट की कीमत में काफी बढ़ोतरी हो जाती है। इसके बाद एक्साइज ड्यूटी आदि लगने के बाद वह दवा कई गुना महंगी बिकती है।
जिले में 13 की जगह अब नौ जन औषधि केंद्र बचे हैं। इसका कारण डॉक्टरों द्वारा जेनरिक दवाएं न लिखना हैं। वहीं, जो जागरूक मरीज जेनरिक दवाएं खरीद भी लेते हैं, उन्हें डॉक्टर वापस करने का दबाव बनाते हैं। जबकि, कई डॉक्टर खुद जेनरिक दवाएं खरीदकर खाते हैं।
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दिवाकर त्रिपाठी, संचालक, जन औषधि केंद्र।
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